इटावा, जागरण संवाददाता। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का इटावा डिपो कंडम बसों के सहारे चल रहा है। डिपो की 50 प्रतिशत बसें रोड पर चलने लायक नहीं बची है। बावजूद इसके इटावा डिपो हजारों यात्रियों की जान जोखिम में डालकर उन्हें इन्हीं बसों से यात्रा करवा रहा है। हकीकत तो ये है कि विभागीय मानकों के मुताबिक इन बसों को चलने की बजाय नीलाम करवा देना चाहिए लेकिन इन बसों को 600 से 800 किलोमीटर तक के लंबे रूटों पर यात्रियों की जान की परवाह न कर दौड़ाया जा रहा है। 

इसके अलावा 20 प्रतिशत बसें ऐसी भी हैं जो इस श्रेणी में शामिल होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। डिपो में चालक और परिचालकों की भी कमी है, जिससे कई गाड़ियों का संचालन भी नहीं हो पाने से यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है।

डिपो पर प्रतिदिन लगभग 10-15 लाख की आय

इटावा रीजन में आठ डिपो आते हैं, जिनमें औरैया, फर्रुखाबाद, छिबरामऊ, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद, बेबर, सैफई व इटावा शामिल हैं। जिनमें निगम की कुल 471 बसों का संचालन होता है। लेकिन बात की जाए मात्र इटावा डिपो की तो डिपो के पास खुद की कुल 71 बसे हैं। जबकि 10 प्राइवेट बसों को अनुबंध पर संचालित किया जा रहा है। कुल 81 बसों का संचालन इटावा डिपो से रोजाना अलग अलग रूटों पर किया जाता है। जिससे डिपो प्रतिदिन लगभग 10-15 लाख की आय प्राप्त करता है।

10 से 12 साल पुरानी बसें, 19 लाख तक पहुंचा मीटर

विभागीय मानक की बात की जाए तो इटावा डिपो की 30 बसें यात्रियों के सफर लायक नहीं बची है और कंडम स्थित में पहुंच चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा 22 बसें 2011 में रजिस्टर्ड हुई हैं तो वहीं तीन बसें 2012 में रजिस्टर्ड हुई हैं। कुल मिलाकर यह लगभग 10 से 12 साल पुरानी हो चुकी हैं। 

साथ ही किलोमीटर के हिसाब से ये सभी बसें 10 लाख से 19 लाख तक चल चुकी हैं। इस हिसाब से इन्हें सड़क पर चलाने की जगह कंडम घोषित कर नीलाम कर दिया जाना था लेकिन वर्तमान में भी यह बसें संचालित हो रही हैं। 

रोडवेज की प्रत्येक बस में 52-55 यात्री के बैठने की क्षमता होती है। इटावा डिपो की यह 30 बसें ऐसी हैं जो अभी भी हाईवे से लेकर सड़कों पर रोजाना फर्राटा भरती है। वहीं 15 बसें ऐसी हैं जो निकट भविष्य में इस श्रेणी में शामिल होने की कगार पर पहुंच चुकी है। इन सबके बावजूद भी यात्रियों की जान की परवाह न कर इटावा डिपो इन्हें ढोने को मजबूर है।

सिर्फ 30 बसों के सहारे चल रहा डिपो

यात्री अपनी मंजिल पर समय और भरोसे के साथ पहुंचना चाहता है जिसके लिए वह रोडवेज बसों का सहारा लेता है, लेकिन रोडवेज पर अच्छी बसें न होने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

आए दिन रोडवेज की खस्ताहाल बसों के कहीं न कहीं खराब हो जाने की सूचनाएं मिलती रहती हैं। कहीं उनमें कुर्सियां टूटी होती हैं तो खिड़की टूटी पड़ी हुई हैं। जिससे सर्दी के इस मौसम में यात्रा के दौरान यात्रियों को भारी परेशानियां उठानी पड़ती है। यहीं नहीं कंडम हो चुकी बसें बीच रास्ते में खराब हो जाने के कारण यात्रियों को समय भी बर्बाद करना पड़ता है।

डिपो के कर्मचारियों की स्थिति डिपो में 

सरकारी कर्मचारी- 49

संविदा कर्मी ड्राइवर- 127

संविदा कर्मी कंडक्टर- 124

ठेका कर्मी- 34

डिपो की टोटल बसें- 71

अनुबंधित बसें- 10

डिपो से इन रूट पर संचालित हैं यह बसें

नई दिल्ली रूट पर सराय काले खां व आनंद बिहार के लिए - 22

हरिद्वार - 2

बनारस- 3

गोरखपुर-3

कानपुर-10

आगरा- 10

औरैया- 7

मैनपुरी- 3

बरेली- 1

हरदोई- 1

बेवर-फर्रुखाबाद रुट- 10 अनुबंधित बसें

जीएम बोले- बसों को चलाना मजबूरी

डेढ़ दर्जन बसों को नीलाम कराने का प्रस्ताव तैयार करके मुख्यालय भेजा गया है। मुख्यालय से गाड़ियां प्राप्त होने के बाद इन गाड़ियों की नीलामी कराई जाएगी। नई बसों के आने तक इन्हीं बसों को चलाना मजबूरी है, नहीं तो आवागमन में संकट खड़ा हो जाएगा। 

-बीपी अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज।

Edited By: Shivam Yadav

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