संवाद सहयोगी, चकरनगर : कोविड-19 महामारी के चलते शहरों से गांव लौटे युवक न सिर्फ बेरोजगार हो गए बल्कि तंगी के हालातों में दो वक्त की रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। इसलिए कभी एयर कंडीशन में ड्यूटी करने वाले युवक अब 45 डिग्री के तापमान में मनरेगा में फावड़ा चलाने को मजबूर हैं। उनकी इसी मजबूरी में अपना फायदा देख रहे रोजगार सेवक डेढ़ गुना काम लेकर चहेतों को आराम दे रहे हैं। चकरनगर ब्लाक की ग्राम पंचायत सहसों में मनरेगा से कराए जा रहे मेड़बंदी के कार्य को लेकर प्रवासी तब भड़क गए जब रोजगार सेवक ने बगैर फीता के अनुमानित चार मीटर लंबी और एक मीटर गहरी मिट्टी खोदने का काम दे दिया। ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर पांच से सदस्य दिलीप कुमार ने इसको मानक के विपरीत बताते हुए आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक अपनी मनमर्जी से काम करा रहे हैं और आज तक ग्राम सभा की एक बार भी बैठक नहीं बुलाई गई है और न ही किसी भी प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर कराए गए हैं। प्रस्ताव पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। वार्ड नंबर चार से सदस्य मछला देवी के पति राजेंद्र यादव ने भी दिलीप की बात का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधान द्वारा पांच वर्ष के कार्यकाल में सही कार्य न करके सिर्फ अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने और मतदाताओं को रिझाने के लिए कार्य किया जा रहा है। प्रदीप कुमार सदूपुरा ने बताया कि प्रवासियों से अधिक काम कराया जा रहा है और जो मजदूर घर पर लेटे हैं, उनकी फर्जी हाजिरी लगाकर पैसे का बंदरबांट किया जाता है। मौके पर मौजूद दो दर्जन मजदूर ग्राम प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक के विरोध में खड़े दिखाई दिए। रोजगार सेवक विमलेश कुमार ने बताया कि फीता अभी आ रहा है, तब नाप हो जाएगा। तीन मीटर मिट्टी खोदने के आदेश हैं, अभी अंदाज से दे दी गई है। ग्राम पंचायत सचिव रमेश तिवारी ने बताया कि प्रवासियों को नया काम दिया गया है। इसको पूरा करने पर ही भुगतान होगा। प्रस्ताव पर सभी के हस्ताक्षर होते हैं कोई छूट गया हो तो नहीं पता।

Posted By: Jagran

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