संवादसूत्र, ऊसराहार : ताखा तहसील क्षेत्र की दो गोशालाओं में परौली रमायन से भेजे गए 58 गोवंश में 10 की मौत हो जाने पर जनपद मुख्यालय के अधिकारी जागे। इसके तहत जिला विकास अधिकारी दीनदयाल वर्मा गोशालाओं को निरीक्षण करने पहुंचे, जिन्होंने गोवंश को बचाने के लिए हरा चारा खिलाए जाने तथा कीचड़ के बजाए सूखे स्थान पर गोवंश रखने के कड़े निर्देश दिए। शनिवार को जिला विकास अधिकारी दीनदयाल वर्मा, बीडीओ ताखा आशुतोष कुमार के साथ गांव मुरचा टाडेहार व ऊसराहार की गोशाला का निरीक्षण करने पहुंचे। मुरचा मे गायों के खाने के लिए सूखा भूसा नांदों में डाला गया था। इस गोशाला में 18 गोवंश रमायन से भेजे गए थे जिसमें अब तक आठ दम तोड़ चुके हैं। इनकी पूर्ति के लिए आसपास छुट्टा घूम रहे 11 गोवंश पकड़कर गोशाला में कर दिए गए हैं। इस तरह कुल संख्या अब 21 हो गई है जो सूखा भूसा खाते मिले। ऊसराहार की गोशाला में निरीक्षण के दौरान एक गोवंश बीमार मिला। डा. एमपी सिंह ने बताया लगातार इलाज करने के बाद भी गाय खड़ी नहीं हो पा रही हैं। इस गोशाला में भेजे गए 30 जानवरों में से 28 रह गए हैं, दो की मौत हो चुकी है। प्रधान प्रतिनिधि आलोक मिश्रा ने बताया उनकी पंचायत में गोचर की जमीन ही नही है इसलिए हरे चारा की समस्या आ रही है। वहां मौजूद कई ग्रामीणों ने घूम रहे छुट्टा जानवरों को भी गोशाला में भेजने की मांग की। जिला विकास अधिकारी ने बताया गोवंश की देखभाल के लिए डाक्टरों की टीम सुबह शाम निरीक्षण कर रही है। गोवंश को स्वस्थ करने की पूरी कोशिश की जा रही है। बहुत जल्द ताखा में दो और गोशालाओं को शुरू किया जाएगा जिनमें छुट्टा गोवंश को रखा जाएगा। छुट्टा गोवंश किसानों के लिए आफत ताखा क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं। गोवंश किसानों और राहगीरों के लिए आफत बने हुए हैं, जो फसलों को खा रहे हैं, तो दूसरी ओर सड़कों पर राहगीरों का आवागमन मुसीबतजदां किए हुए हैं। सबसे ज्यादा घूमने वाले जानवरों की संख्या ऊसराहार, सरसईनावर, भरतिया कोठी, ताखा व समथर में है।

Edited By: Jagran