चंबल में बाढ़ न आने से घड़ियालों को फायदा, 50 प्रतिशत घड़ियाल बच्चों के जीवित रहने का अनुमान
चंबल नदी में इस वर्ष बाढ़ न आने से घड़ियाल के लगभग एक हजार बच्चों के लिए जीवनदायिनी साबित हो ...और पढ़ें

देशराज यादव, इटावा। घड़ियालों के लिए संरक्षित चंबल नदी में इस बार बाढ़ न आने से संरक्षित किए गए घड़ियाल के करीब एक हजार बच्चों के लिए चंबल जीवनदायिनी साबित हो सकती है। बाढ़ के दौरान 95 से 99 फीसदी बाढ़ में बहने वाले बच्चे कुछ जानकारों के मुताबिक इस बार बड़ी संख्या में बच सकते हैं। सैंक्चुअरी को इस बार घड़ियाल के बच्चों के रूप में बड़ा इजाफा होने वाला है।
सैंक्चुअरी की संरक्षित चंबल नदी में मुरैंग से लेकर पचनद तक करीब 85 किमी के क्षेत्र में 1089 घड़ियालों की संख्या है। जिसमें इस वर्ष करीब 37 नेक्स्ट से घड़ियाल के एक हजार बच्चे घोंसलों से निकल कर चंबल नदी में प्रवेश कर गए हैं, जो विभाग की टीम की निगरानी में घड़ियालों के लिए मुफीद चंबल नदी में पल बढ़ रहे हैं।
विभाग के मुताबिक, इस बार चंबल में अभी तक बाढ़ नहीं आई है, जिससे घड़ियाल के करीब 50 फीसदी बच्चों की जान बच सकती है, क्योंकि हर वर्ष चंबल नदी में भीषण बाढ़ आने से 95 से 99 फीसदी बच्चे मर जाते थे, जिसमें अधिकतर घड़ियाल के बच्चे बाढ़ के तेज पानी के बहाव में बह कर मर जाते थे और कुछ को मगरमच्छ खा जाते हैं।
यही नहीं इसके अलावा छोटे-छोटे बच्चों का शिकार चील व अन्य जंगली जीव, सियार खा जाते हैं। इसके बाद कुछ घड़ियाल के बच्चे शिकारियों के चंगुल में भी फंस कर मारे जाते हैं।
चंबल में बाढ़ का न आना इनके लिए जीवनदायी साबित हो सकता है, लेकिन इसके बाद घड़ियाल के बच्चों की रखवाली की जिम्मेदारी सैंक्चुअरी विभाग की और भी अधिक बढ़ जाएगी, तभी अधिक बच्चों की जान बचाई जा सकती है।
बताते चलें कि वर्ष 2025 में इन दिनों चंबल नदी में बाढ़ आ रही थी। बाढ़ के पानी से क्षेत्र के करीब 20 गांव के रास्ते बंद होने से चारों तरफ से घिरे थे।
गांव के रास्तों में इतना पानी भरा था कि वाहन चलने के बजाय नौका चल रही थीं, लेकिन इस बार चंबल नदी का जलस्तर बिल्कुल नीचे है, जिससे बाढ़ का खतरा कम हो गया है।
पर्यावरण विद राजीव चौहान कहते हैं कि अगर बाढ़ चंबल में नहीं आती है तो घड़ियालाें के सुरक्षित होने का प्रतिशत बढ़ जाएगा, जो उनके सुखद होगा।
विश्व में चुनिंदा स्थानों पर पाई जाती है गैवल्स गैंगेटिक्स प्रजाति
चंबल नदी में एक मात्र गैवल्स गैंगेटिक्स प्रजाति का ही घड़ियाल पाया जाता है। जानकारों के मुताबिक यह घड़ियाल चंबल के अलावा ककनियां घाट गिरवा नदी के अतिरिक्त नेपाल में नारायणी व कल्याणी नदी में पाया जाता है। वहीं, पाकिस्तान की सिंध नदी में पाया जाता था, किंतु यहां चेक डैम बनने के कारण इनकी प्रजाति विलुप्त हो गई।
चंबल नदी में बाढ़ नहीं आती है, तो निश्चित ही घड़ियालों की संख्या में इजाफा होगा, 40 फीसदी घड़ियाल के बच्चे अधिक बचने का अनुमान है, इससे अधिक इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्यों कि अभी नदी में बाढ़ की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
-कोटेश त्यागी, चंबल सैंक्चुअरी रेंजर चकरनगर
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