जागरण संवाददाता, इटावा : इस समय जिले में वायरल बुखार का प्रकोप छाया हुआ है। जिला अस्पताल में हर दिन की तरह 442 मरीज वायरल बुखार से तपते हुए पहुंचे। जिन मरीजों की जांच मेडिकल कालेज सैफई भेजी गई थीं, शनिवार की दोपहर तक जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से दो डेंगू के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। वार्ड हाउसफुल हो चुका है और मरीज भर्ती करने की जगह नहीं बची है। इस समय डेंगू वार्ड में 41 बुखार के मरीज भर्ती हैं। लैब में जांच कराने 35 मरीज पहुंचे जिसमें नौ के नमूने संदिग्ध मानकर उप्र आयुर्विज्ञान विश्व विद्यालय सैफई भेजे गए हैं। एक बच्चा निमोनिया का भर्ती जिला अस्पताल के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डा. पीके गुप्ता ने बताया कि इस समय बच्चे भी खांसी, जुकाम, बुखार के अधिक आ रहे हैं। 150 बच्चों में एक बच्चा निमोनिया से गंभीर हालत में आया उसे भर्ती करके इलाज दिया जा रहा है। बुखार में आयुष की दवाएं कारगर जिला अस्पताल के आयुष चिकित्सक डा. अरुण कुमार मेहरोठिया का कहना है कि इस समय चल रहे वायरल बुखार पर काबू पाने में देसी दवाएं कारगर हो सकती हैं। मरीज अगर संजीवनीवटी, त्रिभुवन कीर्ति रस, गोदंती मिश्रण, लक्ष्मी विलास रस, गिलोह चूर्ण व सितोपलादि चूर्ण का सेवन करें तो बुखार से राहत मिल सकती है।

प्लेटलेट्स कम होने पर इस्तेमाल करें अगर किसी मरीज की प्लेटलेट्स गिर रही हैं तो वह पपीता के पत्ते का रस, बकरी का दूध, नारियल पानी व कीवी फल खाने से आराम संभव है। यह कहना है आयुष चिकित्सक डा. अरुण मेहरोठिया का। नहीं रुका अस्पताल परिसर का जल भराव हल्की सी बारिश में ही जिला अस्पताल के परिसर में जल भराव हो जाता है जबकि अस्पताल में रैन वाटर हार्वेस्ट बनवाया गया था। शनिवार को भी मरीजों व उनके तीमारदारों को जल भराव का समाना करना पड़ा। जिला अस्पताल में शनिवार को भी जहां मुख्य रजिस्ट्रेशन काउंटर से 840 मरीजों ने पर्चे बनवाए वहीं इमरजेंसी से भी तकरीबन 150 पर्चे जारी किये गये। बुखार का प्रकोप अभी थमा नहीं है। डा. एमएम आर्या

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