यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सर्दी का सितम, ठिठुर रहा जनजीवन
सर्दी के सितम से जनजीवन प्रभावित बना हुआ है। शीतलहर के मध्य ठंडी हवाओं से बढ़ती ठिठुरन के चलते गलनभरी ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, एटा: सर्दी के सितम से जनजीवन प्रभावित बना हुआ है। शीतलहर के मध्य ठंडी हवाओं से बढ़ती ठिठुरन के चलते गलनभरी सर्दी का एहसास हाड़ कंपा रहा है। शनिवार को सुबह कोहरा कम रहा, लेकिन बादलों की ओट से बारिश होने की स्थिति बनी रही, लेकिन दोपहर बाद सूर्यदेव चमके, लेकिन राहत न मिल सकी।
शुक्रवार को घने कोहरे तथा पूरे दिन सूर्य देव के दर्शन न होने के बाद शनिवार को सुबह कोहरा तो कम था, लेकिन सर्दी में कोई राहत नहीं थी। ठंडी हवा सुबह से ही चली। इसी कारण न्यूनतम तापमान स्थिर रहते हुए 6 डिग्री सेल्सियस बना रहा। उधर गलन भरी सर्दी के चलते अधिकतम तापमान भी 2 डिग्री सेल्सियस कम होकर 14 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। कड़ाके की ठंड का असर जनजीवन पर शनिवार को भी दिखाई दिया, जब सुबह 11 बजे तक सड़कों पर लोग कम ही निकलते नजर आए। कोहरा कम होने की वजह से धूप जल्दी निकलने की उम्मीद रही, लेकिन बादलों ने सूर्य देव को छुपाए रखा। 2 बजे के बाद सूर्यदेव के दर्शन तो हुए, लेकिन धूप में गर्मी नहीं होने तथा ठंडी हवाओं से कोई राहत न मिल सकी।
गलन भरी सर्दी से जनमानस ठिठुरन महसूस करता रहा, बल्कि पशु पक्षियों पर भी सर्दी का असर दिखा। बाजारों में कम रौनक के मध्य लोग जरूरत का सामान खरीदने ही निकले। सुबह से लेकर देर शाम तक लोग अलाव या इलेक्ट्रानिक हीटर से राहत पाने की जुगत करते रहे। शाम होते ही फिर बादल छाते दिखाई दिए। उधर मौसमी रोगों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों तथा बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर मौसम का असर चिताजनक बना हुआ है। उधर मौसम का हाल अभी भी किसान वर्ग को उलझन में डाले हुए हैं। डा. चेतन चौहान का कहना है कि बढ़ती सर्दी के मध्य लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा। अपने पहनावे तथा खान-पान को सर्दी से बचाव के अनुकूल रखें।
