एटा, जासं। यातायात माह चल रहा है और ट्रैफिक पुलिस संसाधनों के अभाव से जूझ रही है। हर साल यही होता है, यातायात माह संसाधनों के अभाव में यूं ही गुजर जाता है। यहां न पर्याप्त गाड़ियां हैं और न ही वाहनों को खींचने के लिए क्रेन, इस काम के लिए नगर पालिका पर निर्भर रहना पड़ता है। ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक बूथ की व्यवस्था भी नहीं है। जेब्रा क्रासिग और ट्रैफिक सिग्नल के प्रस्ताव विभागों के पास पड़े हुए हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो रहा। उपकरणों का भी अभाव है।

ट्रैफिक पुलिस में पूर्व में पर्याप्त स्टाफ नहीं था, लेकिन यह कमी होमगार्ड ने पूरी कर दी। होमगार्ड के 60 जवान ट्रैफिक पुलिस से संबद्ध किए गए हैं, जो यातायात पुलिस कर्मियों का सहयोग ट्रैफिक नियंत्रण करने में करते हैं, लेकिन चालान काटने का अधिकार सिर्फ यातायात के पुलिस जवानों को ही है। स्टाफ की कमी होमगार्ड के जरिए भले ही पूरी कर ली गई, लेकिन होमगार्ड में प्रशिक्षण का अभाव साफ दिखाई देता है। यातायात पुलिस को क्रेन की सख्त जरूरत है जो हर समय उसके पास उपलब्ध रहे। अगर किसी वाहन को खींचकर ले जाना है तो नगर पालिका को सूचना देनी पड़ती है, वहां अगर क्रेन उस समय खाली है तो मिल जाती है वरना घंटों तक इंतजार ही करना पड़ता है। सीओ सिटी एवं ट्रैफिक देव आनंद ने बताया कि संसाधन मुहैया कराने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं फिर भी ट्रैफिक पुलिस जो भी साधन हैं उनमें यातायात व्यवस्था का संचालन कर रही है। जेब्रा क्रासिग को पांच प्वाइंट चिह्नित

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शहर में जेब्रा क्रासिग बनाने के लिए पांच प्वाइंट चिह्नित हैं। इनमें तीन प्वाइंट हाथी गेट पर, एक अलीगंज तिराहा और एक होटल माया पैलेस पर चिहित है। हाल ही में ट्रैफिक पुलिस ने एक प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग और एनएचएआइ को भेजा है कि वह जेब्रा क्रासिग बनवाए, लेकिन उस पर कोई अमल नहीं हुआ। धुआं मापक उपकरण खराब

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प्रदूषण को लेकर दिन पर दिन सख्ती बरती जा रही है, लेकिन यातायात पुलिस के पास धुआं मापने वाला उपकरण भी खराब पड़ा है। किसी भी वाहन से कितना भी धुआं निकलता रहे, मगर उसकी नाप नहीं हो सकती। स्पीडो मीटर जरूर उपलब्ध करा दिया गया है। छह चाहिए ट्रैफिक बूथ

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शहर में यातायात नियंत्रण के लिए हाईवे पर आधा दर्जन ट्रैफिक बूथों की जरूरत है। ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को बीच सड़क पर खड़े होकर ड्यूटी देनी पड़ती है। बूथों के लिए प्रस्ताव भी नगर पालिका को पहले ही दे दिए गए हैं, लेकिन उन पर भी अमल नहीं हो रहा।

Posted By: Jagran

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