एटा, जासं। मंडी शुल्क और बिजली दरों में वृद्धि ने व्यापारियों को लामबंद कर दिया है। व्यापार मंडल ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विरोध की तैयारी भी शुरु कर दी है। बुधवार को एटा नगर उद्योग व्यापार मंडल के नेताओं ने कलक्ट्रेट मुख्यालय पर बिजली दरों में वृद्धि को वापस लेने और मंडी शुल्क को समाप्त किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

इस अवसर पर व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष अतुल राठी ने अपर जिलाधिकारी वित्त राजस्व केशव कुमार को अवगत कराया कि पड़ोसी राज्यों में मंडी शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया हैं। उनका कहना था कि मंडी शुल्क का सीधा असर किसान के उत्पादन पर पड़ता है। व्यापारी किसान के उपज के मूल्य का भुगतान मंडी शुल्क की राशि घटाकर देता है। जिससे किसान को उसके उत्पाद का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता। उन्होने किसान और मंडी व्यापारियों दोनों को राहत देने के लिए मंडी शुल्क पूरी तरह समाप्त किए जाने की मांग की है। प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि मंडी शुल्क से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। नीतीश की सरकार में मंडी शुल्क समाप्त कर दिया गया है। उन्होने याद दिलाया कि जब जीएसटी लगा था, तब प्रधानमंत्री ने देश में एक ही कर प्रणाली लागू किए जाने का वायदा किया था। परंतु, जीरा, सुपाड़ी, सौंफ, धनियां, मिर्चा व तिलहन आदि पर जीएसटी लागू है। इस स्थिति में मंडी शुल्क वसूल किया जाना न्याय संगत नही है। उन्होने बिजली की दरों में की गई वृद्धि को भी वापस लिए जाने की मांग की है।

इस दौरान ज्ञापन देने वालों में प्रदेश मंत्री अशोक सर्राफ, जिला महामंत्री दिनेश वाष्र्णेय, आदेश कुमार गुप्ता, कैलाश चंद्र जैन, शमशाद सलमानी, प्रदीप कुमार गुप्ता, साबिर मियां, अमित कुमार, डेविड जैन, विनायक गुप्ता, अरविद वाष्र्णेय, चंद्रमोहन वाष्र्णेय आदि तमाम व्यापारी नेता मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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