जागरण संवाददाता, एटा: नौ वर्षीय मु. अनस को ऐसी बीमारी ने गिरफ्त में ले लिया है, जो पूरे परिवार के लिए मुसीबत है। थैलेसीमिया के दर्द से न सिर्फ अनस, बल्कि सभी परिजन सिसक रहे हैं।

मारहरा कस्बे में रहने वाले लाल मुहम्मद के तीन बच्चों में मु. अनस सबसे बड़ा है। पिता यहां सिलाई करके परिवार का गुजारा ही कर पाते हैं। ऐसे में उनके सामने इस गंभीर बीमारी से अपने बच्चे को बचाना बहुत बड़ी चुनौती है। जन्म के करीब दो साल बाद जांचों में इस बीमारी का पता लगा था। इसके बाद से अलीगढ़ के मेडिकल कालेज में बच्चे का इलाज करा रहे हैं। दवाओं के साथ ही हर हफ्ते खून भी चढ़ाया जाता है। डॉक्टरों ने स्थायी इलाज की जानकारी तो दी, लेकिन इसकी कीमत इतनी बताई कि परिजन मायूस हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बोर्न मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए बच्चे की यह बीमारी दूर की जा सकती है। जिसमें 20 लाख रुपये का खर्चा आएगा। इसके लिए वह प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर बच्चे के इलाज की गुहार लगा चुके हैं। उनके पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय से निर्देश भी आए और पांच महीने पहले लेखपाल ने आकर जांच की। हालांकि, इसके बाद क्या हुआ, यह किसी को जानकारी नहीं है। पिछले दिनों जिलाधिकारी के आदेश पर उसे रेड क्रॉस सोसायटी से 20 हजार रुपये दे दिए गए। लेकिन यह धनराशि काफी कम है। लाल मुहम्मद ने राज्य आरोग्य निधि के अंतर्गत इलाज कराने के लिए फिर प्रार्थना पत्र दिया है। इस पर भी अभी तक स्थिति कुछ स्पष्ट नहीं हो सकी है। हर हफ्ते खून चढ़ना जरूरी

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डॉक्टरों ने बताया है कि उम्र भर अनस को खून चढ़ाना जरूरी है। साल भर में करीब 50 हजार रुपये का खर्चा आता है। अधिकारी की बात

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थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे के इलाज में आर्थिक मदद के रूप में रेड क्रॉस सोसायटी से 20 हजार रुपये दिए जा चुके हैं। अब राज्य आरोग्य निधि से मदद के लिए आवेदन आया है। जिस पर कार्रवाई की जा रही है। इसमें बच्चे के इलाज के लिए मेडिकल कालेज को शासन से धनराशि अंतरित की जाएगी।

- डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ

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