जासं, एटा: मेडिकल कालेज को बदइंतजामी से निजात नहीं मिल पा रही। एमसीएच विग के बर्न वार्ड में एसी नहीं है, जबकि डाक्टरों की केबिन में एसी चल रहे हैं। जलन से तड़पकर आग से झुलसा हुआ मरीज भीषण गर्मी में तड़पता रहा, ठंडक के लिए कोई जगह नहीं मिली तो नाली में पड़ा रहा। कालेज के डाक्टर, कर्मचारी उसे देखते रहे पर किसी ने भी हाल पूछने की जहमत नहीं उठाई।

गुरुवार को जैथरा क्षेत्र के गांव गौसलपुरा में घर में आग लगने के कारण 65 वर्षीय वृद्ध रामजीलाल गंभीर रूप से जल गए थे। तब से वह मेडिकल कालेज में भर्ती हैं। कालेज की एमसीएच विग में अस्थायी रूप से बर्न वार्ड बनाया गया है, लेकिन वहां आग से जले व्यक्तियों के लिए कोई सुविधा नहीं है, जबकि नियमानुसार बर्न वार्ड में एसी होना चाहिए ताकि जले हुए मरीजों को होने वाली जलन से कुछ राहत मिल सके। वार्ड में मरीजों को सिर्फ मरहम पट्टी कर दी जाती है और इसके बाद यूं ही छोड़ दिया जाता है। सोमवार को रामजीलाल को जब ज्यादा जलन हुई तो वे चीखने-चिल्लाने लगे। आरोप है कि कर्मचारियों ने अभद्रता करते हुए रामजीलाल को वार्ड से निकाल दिया। दिन में वह पहले पेड़ की छांव के नीचे बैठे रहे और जब ज्यादा जलन हुई तो नाली में बैठ गए, ताकि कुछ ठंडक मिल सके, लेकिन भीषण गर्मी और भारी उमस के चलते जलन बढ़ती रही। कई डाक्टर और कर्मचारी रामजीलाल के सामने होकर निकल गए, लेकिन किसी ने भी पलटकर नहीं देखा कि मरीज आखिर क्यों चिल्ला रहा है।

दरअसल, जब मेडिकल कालेज बनने से पूर्व जिला अस्पताल वर्न वार्ड की व्यवस्था थी, जिसमें एसी सहित अन्य सुविधाएं थीं। यह वार्ड बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में आग से जलने वाले मरीजों के लिए एमसीएच विग में एक वार्ड बनाकर व्यवस्था की गई, मगर इस वार्ड में एसी नहीं लगाए गए, जिसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं। दूसरी तरफ स्थिति यह है कि हर डाक्टर की केबिन में एसी चल रहे हैं, मगर मरीजों के लिए व्यवस्था नहीं है। सीएमएस डा. राजेश अग्रवाल ने बताया कि आग से जले मरीज की जानकारी मिलने पर उसे पुन: वार्ड में भेज दिया गया है। एसी के बारे में भी जानकारी की जा रही है, शीघ्र व्यवस्था कराई जाएगी।

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