जागरण संवाददाता, एटा: 25 नवबंर मांस रहित दिवस घोषित किए जाने के बाद भी नगर पालिका के सामने मछली बाजार पूरे दिन खुला रहा। जबकि अपर मुख्य सचिव ने निकायों को मांस की दुकानें बंद रखवाने का आदेश दिया था। इसके बाद भी शासनादेश की अनदेखी करते हुए मछली बाजार खोला गया। अन्य जगहों पर दुकानें बंद होने के कारण मछली बाजार में लोगों ने खूब मछली खरीदीं।

महात्मा गांधी, महावीर और बुद्ध जयंती की भांति साधु टीएल वासवानी की जयंती पर भी मांस की दुकानें बंद रखने का शासनादेश था। अपर मुख्य सचिव डा. रजनीश दुबे ने नगर पालिका को 25 नवंबर के दिन सभी मीट की दुकानें बंद कराने का आदेश दिया था। गुरुवार को नगर पालिका के ठीक सामने मछली बाजार के व्यवसायियों ने अपनी दुकानें खोली। इसे लेकर शासनादेश की अवहेलना होती हुई दिखी। इतना ही नहीं दूसरी जगहों पर दुकानें बंद होने के कारण मछली बजार में लोगों की अधिक भीड़ भी देखने को मिली। वहीं, नगर पालिका ईओ डा. दीप कुमार वाष्र्णेय ने बताया कि मछली बाजार लगाने वालों को शासनादेश से अवगत करा दिया गया था। इसके बाद भी बाजार लगा है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिबंधित मछली की हो रही बिक्री

संक्रमित बीमारियां फैलाने वाली थाई मांगुर मछली की बिक्री पर शासन ने रोक लगा दी है। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण जनपद में कई जगहों पर इसकी बिक्री की जा रही है। इससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

नहीं करते अपशिष्ट पदार्थ का निस्तारण

जनपद भर में दर्जनों मीट की दुकानें बिना लाइसेंस के संचालित हो रही हैं। नगरपालिका से एनओसी भी नहीं ली जा रही है। सबसे खास बात तो यह है कि मीट की दुकान संचालित करने वाले लोग अपशिष्ट पदार्थ का निस्तारण भी नहीं करते हैं और उसे खुले में ही डाल देते हैं। इससे लोगों में संक्रामक बीमारियां भी फैलती हैं। शासनादेश में अपशिष्ट पदार्थ का जमीन में दफन करके विधिवत तरीके से निस्तारण करना शामिल हैं।

Edited By: Jagran