एटा, जागरण संवाददाता: शहर में सीवर लाइन बिछाने का कार्य काफी धीमी गति से हो रहा है। कई संकुचित गलियों में खोदाई कर उन्हे छोड़ दिया गया है। वहां न तो सीवर पाइप डाले जा सके हैं, और नही काम की शुरुआत ही की जा सकी है। ऐसे इलाकों में आवागमन तो प्रभावित है ही, साथ ही जलभराव भी बिन बारिश समस्या बना हुआ है।

वर्षा में यह समस्या कितनी गंभीर होगी? इसके परिणाम तो मानसून की वर्षा की ठीक से शुरुआत होते ही सतह पर देखने को मिलेंगे। लेकिन शहर में सीवर की पाइप लाइन डालने के लिए जो खोदाई करा दी गई है, उसने नागरिकों के जेहन में कई आशंकाओं को जन्म दे दिया है। उनका मानना है कि यदि वर्षा तक ये खोदे गए ये गड्ढे यूं ही बने रहे तो गलियों में होने वाले जलभराव के दौरान लोगों को इस बात का अहसास ही नहीं हो सकेगा, कि गड्ढा कहां है? ऐसे में उनके इन गहरे गड्ढों में गिर कर चोटिल होने की घटनाएं आम हो जाएगीं।

गांधी मार्केट में सीवर के लिए हुई खोदाई के बाद गड्ढे को न भरने का खामियाजा पिछले दिनों एक महिला और उसके पुत्र को झेलना पड़ा था। दोनो मां बेटा चोटिल होकर जिला अस्पताल के आपातकक्ष में भर्ती हुए।

Posted By: Jagran

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