जासं, एटा: दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के मामलों में विशेष न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर आरोपितों को जेल से रिहा करा दिया। अदालत के सत्र लिपिक के खिलाफ दो अदालतों द्वारा कोतवाली नगर में एफआइआर दर्ज कराई है।

अपर जिला व सत्र न्यायाधीश रेप / पाक्सो एक्ट के मुंसिब अज्ञान विजय द्वारा दर्ज कराई एफआइआर में बताया कि कोर्ट के सत्र लिपिक मनोज ने अदालत के पाक्सो एक्ट के मामले में आरोपित उमेश पुत्र राजवीर सिंह निवासी लोधई थाना सहपऊ जिला हाथरस को पीठासीन अधिकारी विपिन कुमार के अवकाश पर रहने के कारण विशेष न्यायाधीश प्रथम कुमार गौरव के कूटरचित हस्ताक्षर बनाकर फर्जी परवाना बना दिया। जिला कारागार से रिहा करा दिया। इसके अलावा कोतवाली देहात थाने में 2019 में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म व मारपीट करने के मामले में नामित चल रहे आरोपित विकास बघेल निवासी बारथर थाना कोतवाली देहात को प्रभारी अधिकारी अपर जिला जज कैलाश कुमार के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर रिहाई परवाना जारी कर दिया और आरोपित जेल से छूट गया। इस पर पाक्सो एक्ट प्रथम की अदालत के रीडर नवरतन सिंह ने सत्र लिपिक मनोज के खिलाफ कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया है। जांच में दोषी पाए गए आरोपित सत्र लिपिक:

आरोपित सत्र लिपिक की शिकायत दो जनवरी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश रेप एवं पाक्सो एक्ट ने जनपद न्यायाधीश से की। इस पर हुई प्राथमिक जांच में पाया गया कि आरोपित लिपिक ने फर्जी रिहाई परवाना बनाया। इसके आधार पर आरोपित उमेश 21 अक्टूबर 2020 को जमानत मंजूरी के आधार पर जेल से रिहा कर दिया गया। 16 जुलाई को जनपद न्यायाधीश म़दुलेश कुमार सिंह ने उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। अब यह रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। सत्र लिपिक द्वारा जजों के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर परवाना जेल में भेज दिए थे, जिससे आरोपितों की रिहाई हो गई। अदालत द्वारा कराई गई जांच में लिपिक को दोषी पाया गया, इसके आधार पर दी गई तहरीर को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है।

- सुभाष बाबू कठेरिया, शहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक, एटा

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