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जागरण संवाददाता, एटा: सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बुधवार को फिर उजागर हुई। एक गर्भवती को खून की कमी बताकर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। परिजन महिला को लेकर जा रहे थे कि गेट पर प्रसव हो गया। इसके बाद कर्मचारियों ने महिला व नवजात को भर्ती कर उपचार दिया।

गांव मरथरा भगवानदास निवासी राजेश 28 वर्षीय गर्भवती पत्नी नारायन देवी को एंबुलेंस से मंगलवार रात 12.10 पर जिला महिला अस्पताल लाए। यहां बताया गया कि सब कुछ सामान्य है, प्रसव हो जाएगा। इस पर राजेश और परिजनों ने राहत की सांस ली। बुधवार दोपहर 12.30 बजे जब नारायन देवी को प्रसव पीड़ा हुई तो कर्मचारियों ने बताया कि खून की कमी है। दो यूनिट खून की जरूरत है, तभी प्रसव हो पाएगा। राजेश खून की जानकारी करने जिला अस्पताल की ब्लड बैंक पहुंचे। बताया गया कि खून तो मिल जाएगा लेकिन इसके बदले में खून देना होगा। कमजोरी के कारण राजेश को खून देने से मना कर दिया। राजेश के साथ उनकी मां थीं। राजेश ने बताया कि कर्मचारियों ने कहा, खून की कमी के चलते ऑपरेशन से बच्चा हो सकता है। इन्हें आगरा ले जाओ। हम लोग नारायन देवी को लेकर निकले ही थे कि इमजरेंसी गेट के बाहर प्रसव हो गया। इसके बाद कर्मचारियों ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कर लिया। नवजात बच्ची और महिला वार्ड में भर्ती हैं, दोनों स्वस्थ हैं।

जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि महिला को टहलने को कहा गया था, इमरजेंसी गेट के पास प्रसव हो गया। कर्मचारियों ने पर्दे आदि लगाकर उसे हैंडल किया और दोनों को तुरंत वार्ड में भर्ती करा दिया गया।

Posted By: Jagran

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