एटा, जासं। पोषण अभियान की समीक्षा में हीलाहवाली देख डीएम का पारा चढ़ गया। आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) की टीमों की लापरवाही मिलने पर संबंधित डॉक्टरों-कर्मचारियों का मानदेय रोक दिया। वहीं, निष्क्रिय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्ति के लिए चिह्नांकन करने के निर्देश दिए हैं।

जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक कलक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई। डीएम सुखलाल भारती ने पाया कि जिला अस्पताल में बने एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में अति कुपोषित बच्चे नहीं पहुंचाए जा रहे। मुख्य रूप से यह जिम्मेदारी आरबीएसके टीमों की है। उनका कार्य है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर एनआरसी में भर्ती कराएं। इस लापरवाही को लेकर डीएम ने सभी आरबीएसके टीमों का मानदेय रोकने का आदेश जारी कर दिया। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति पर भी खूब फटकार लगाई। कहा, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल दिए गए हैं। इसके बावजूद कार्यकर्ता न तो केंद्र समय से खोल रहे हैं और ना ही बच्चों की मॉनीटरिग की जा रही है। यह स्थिति काफी निराशाजनक है। सीडीपीओ इस संबंध में सुधार लाएं। केंद्र खुलने के बाद रिपोर्ट न करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय काटने की कार्रवाई की जाए। कम वजन के बच्चों का चिह्नांकन न करने की स्थिति में सीडीपीओ जिम्मेदार होंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्साधिकारी आशा, एएनएम की भी सघन मॉनीटरिग करें। लापरवाही बरतने वाली आशाओं को चिह्नित कर सेवा समाप्त की जाए। बैठक में सीडीओ मदन वर्मा, सीएमओ डॉ. अजय अग्रवाल, डीडीओ एसएन सिंह कुशवाह, सीएमएस डॉ. प्रदीप कुमार और डॉ. राजेश अग्रवाल, डीएसओ राजीव कुमार मिश्रा, समाज कल्याण अधिकारी रश्मि यादव, डीपीओ संजय सिंह, सीडीपीओ सत्यप्रकाश पांडेय, राजीव कुमार, टीएसयू प्रदीप कुमार सहित सभी एमओआइसी, सीडीपीओ, एमओ आदि अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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