सेल्फ स्टडी से लिखी सफलता की कहानी: श्वेता गुप्ता बनीं SDM, 25वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया एटा का मान
सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बावजूद उन्होंने सेल्फ स्टडी से यह सफलता पाई। कई असफलताओं के बाद भी हार ...और पढ़ें

श्वेता गुप्ता।

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जागरण संवाददाता, एटा। सफलता केवल संसाधनों और सुविधाओं पर निर्भर नहीं होती। यह साबित करते हुए सकीट के गांव मानिकपुर की बेटी श्वेता गुप्ता ने राज्य प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (यूपीपीएससी) में 25वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद पर चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है।
ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी श्वेता की इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
संसाधनों की कमी के बावजूद सेल्फ स्टडी से हासिल की सफलता, असफलताओं को बनाया सीढ़ी
श्वेता गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा गांव स्थित केएल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एटा के जवाहरलाल नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी दिशा में निरंतर प्रयास करती रहीं।
जेआरएफ परीक्षा भी उत्तीर्ण की
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी के जरिए की। सीमित संसाधनों के बावजूद किताबों और उपलब्ध संचार माध्यमों का सहारा लेकर उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। इस दौरान उन्होंने जेआरएफ परीक्षा भी उत्तीर्ण की, जो उनकी शैक्षणिक प्रतिभा को दर्शाता है।
उच्च लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए श्वेता दिल्ली गईं
उच्च लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए श्वेता दिल्ली गईं और वहां रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले और दूसरे प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने चार बार प्रारंभिक परीक्षा और तीन बार मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण की। हालांकि अंतिम चयन में उन्हें बार-बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इन असफलताओं को अपनी ताकत बनाया।
तीसरे प्रयास में श्वेता ने यूपीपीएससी परीक्षा में 25वीं रैंक
तीसरे प्रयास में श्वेता ने यूपीपीएससी परीक्षा में 25वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद पर चयनित होकर अपनी मेहनत को सार्थक किया। हाल ही में घोषित यूपीएससी परिणाम में वह कुछ अंकों से पीछे रह गई थीं, लेकिन उनका लक्ष्य अभी भी आईएएस बनना है और वह इसके लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
श्वेता गुप्ता की इस सफलता से वैश्य समाज में भी खुशी की लहर है। उन्हें जिले की पहली ऐसी बेटी माना जा रहा है जिसने इस स्तर की उपलब्धि हासिल कर समाज का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के लोगों ने शुभकामनाएं दी हैं।
सेल्फ स्टडी से लिखी सफलता की कहानी
श्वेता गुप्ता चार भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर हैं। उनके पिता सुनील गुप्ता बिल्डिंग मटेरियल व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि मां पुष्पा गुप्ता गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा का अच्छा माहौल रहा, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उनकी बड़ी बहन शालिनी गुप्ता नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी हैं। छोटा भाई हर्ष गुप्ता बीबीए की पढ़ाई कर रहा है, जबकि सबसे छोटी बहन भूमि गुप्ता स्नातक कर रही हैं।
सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया
श्वेता ने विद्यार्थी जीवन से ही सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और सेल्फ स्टडी को प्राथमिकता दी। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार के साथ-साथ चाचा प्रवीन गुप्ता (प्रधान) को भी लगातार बधाइयां मिल रही हैं। श्वेता आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेते हैं।
