विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एटा का पटना पक्षी विहार: रामसर दर्जा मिला, पर सुविधाओं की कमी से पर्यटक दूर

Published: Tue, 03 Feb 2026 11:21 AM (GMT+05:30)

एटा का पटना पक्षी विहार, रामसर साइट घोषित होने के बावजूद सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। यहाँ पर्यटकों ...और पढ़ें

पटना पक्षी विहार

पटना पक्षी विहार

HighLights

  1. रामसर साइट पटना पक्षी विहार में सुविधाओं का अभाव

  2. पर्यटकों की संख्या कम, स्थानीय लोग ही अधिक आते हैं

  3. झील में नौकायन, स्वच्छ पानी जैसी सुविधाओं की मांग

जागरण संवाददाता, एटा। बेशक पटना पक्षी विहार रामसर साइट घोषित हो गया है और पक्षियों की गणना में भी अव्वल है, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है। इस कारण पर्यटक आकर्षित कम होते हैं। पटना पक्षी विहार जाने वाले लोगों में स्थानीय लोग ही अधिक होते हैं।

बाहर से आने वाले पर्यटकों की तादात न के बराबर रहती है। लोगों का मानना है कि अगर सुविधाएं बढ़ जाएं तो पर्यटक अधिक आकर्षित हो सकेंगे।

स्थानीय लोग ही पहुंचते हैं, रामसर साइट घोषित होने से जगी उम्मीद

जलेसर कस्बा से पटना पक्षी विहार की दूरी पांच किलोमीटर है। दो मंडल मुख्यालयों अलीगढ़ और आगरा, आधा दर्जन जिला मुख्यालयों से पटना पक्षी विहार बमुश्किल 50 से 60 किलोमीटर के बीच है, लेकिन यहां बाहर के पर्यटक बहुत कम दिखाई देते हैं।

एटा जनपद के लोग इसे पिकनिक स्पाट के रूप में देखते हैं। सर्दियों में बहुतायत में पक्षी इस विहार में आते हैं, वहीं पर्यटकों की संख्या कम रह जाती है। इसके पीछे के कई कारण हैं।

मेहमान पक्षियों की अब विदाई की बेला, लोग कर रहे सुविधाओं की मांग

बच्चों के खेलने के लिए जो सुविधाएं होनी चाहिए वे भी नहीं दिखाई देतीं। झील का पानी निर्मल नहीं रहता, क्योंकि पानी में जब सड़न उठती है तो दुर्गंध फैलती है। उचित रखरखाव नहीं है, इस कारण पर्यटक अधिक संख्या में नहीं पहुंचते। यहां खजूर के पेड़ों का वन है इस वजह से थोड़ी आभा दिखाई देती है। बैठने के लिए अच्छा सिटिंग प्लान नहीं। पूर्व में सड़क भी ऊबड़-खाबड़ थी, हालांकि अब उसे ठीक करा दिया गया है।

वोटिंग की नहीं है सुविधा

पटना पक्षी विहार में बड़ी झील है, लेकिन समस्या यह है कि वहां वोटिंग की सुविधा नहीं है। झील किनारे बीच जैसा नजारा होना चाहिए, ताकि पर्यटक आकर्षित हों, मगर झील के किनारे ऊबड़-खाबड़ हैं और उसमें वनस्पति उग आती है। झील में जब पानी कम होता है तो उसे बढ़ाया भी नहीं जता। मेहमान पक्षी 15 फरवरी तक रहते हैं। इसके बाद इनकी विदाई की बेला की शुरूआत हो जाती है। अगर वोटिंग की सुविधा हो जाए तो बच्चों और लोगों के लिए मनोरंजन का साधन उपलब्ध हो सकता है।

हाल ही में हो चुकी है पक्षियों की गणना

पक्षी विशेषज्ञ केपी सिंह के नेतृत्व में हाल ही में पटना पक्षी विहार में पक्षियों की गणना हो चुकी है, जिसमें नार्दन पिनटेल 1270, कामन टील 458, नार्टन शोवलर 432, गेडवाल 369 और कामन कूट 295 पक्षी रहे। क्रेन पेंटेड स्टार्क, कामन पोचार्ड, ग्रेटर स्पाटेड ईगल सहित नौ संकटग्रस्त प्रजातियों को चिंहित किया गया।

इसी गणना के आधार पर पटना पक्षी विहार को हाल ही में रामसर साइट घोषित किया गया, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व बढ़ा है। इस गणना की रिपोर्ट 21 जनवरी को पक्षी विशेषज्ञ ने सौंपी थी।

एक वर्ष में पहुंचे 10 हजार पर्यटक

जिस हिसाब से यहां नवंबर से लेकर फरवरी के अंत तक पक्षियों को लेकर पीक रहता है उस हिसाब से पर्यटकों का आंकड़ा पर्याप्त नहीं है। एक वर्ष में 10 हजार पर्यटक ही पहुंचे। पक्षियों में रुचि रखने वाले लोग भी इन पर्यटकों में शामिल हैं, कुछ शोधार्थी भी आए हैं।

पटना पक्षी विहार की रेंजर मनीषा कुकरैती बताती हैं कि हमारा प्रयास पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का है। यहां प्राकृतिक झील है, कृत्रिम झील नहीं है, जो वर्षा के जल पर आधारित है। इसलिए वोटिंग की सुविधा नहीं है। अब पटना पक्षी विहार को 11वें वेटलेंड का दर्जा मिला है तो इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व भी बढ़ा है। इसलिए अब उम्मीद है कि अधिक संख्या में पर्यटक आकर्षित होंगे।

लोग बोले

जब पटना पक्षी विहार को रामसर साइट घोषित कर दिया गया है तो सरकार को चाहिए कि अधिक से अधिक सुविधाएं दी जाएं, ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़े। - हरेंद्र धनगर, प्रधान पटना

पटना पक्षी विहार को और अधिक रमणीक बनाने के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए, इसके लिए अधिक से अधिक बजट उपलब्ध कराया जाए। अगर सुविधाएं बढ़ेंगी तो पर्यटक बढ़ेंगे। - आयुष पचौरी, व्यापारी

पक्षियों के लिए भी उचित व्यवस्थाएं होनी चाहिए, ताकि शोधार्थी बाहर से आकर यहां शोध कर सकें और पक्षी प्रेमी भी अधिक संख्या में पटना पक्षी विहार के प्रति आकर्षित हों। - हरिश्चन्द्र गुप्ता, उपाध्यक्ष अ.भा. व्यापार मंडल

झील की सफाई होनी चाहिए और यहां वाटर ट्रीटमेंट की भी व्यवस्था हो ताकि झील में वनस्पति न उग सकें और पक्षियों के लिए साफ पानी उपलब्ध हो। - भूपेंद्र सिंह, किसान