जागरण संवाददाता, एटा: भारतीय जनता पार्टी द्वारा सहकारिता चुनावों में दबदबा कायम करने के पीछे एक साल से की जा रही कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत है। इसके अलावा सटीक रणनीति बनाकर उसे समय पर अंजाम तक पहुंचाना ही कामयाबी का भाजपा का बड़ा फार्मूला रहा। सहकारिता की चुनाव में जीत दर्ज करके भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों में काफी संबल मिला है। सहकारिता से जुड़ी समितियों पर कई वर्षों से सपा का एक छत्र राज था। यह वर्चस्व तोड़ने में भाजपा कामयाब रही।

विभिन्न समितियों से लेकर सहकारी बैंक तक के चुनाव में नये लोगों को जोड़ने की रणनीति भाजपा ने अपनाई। इसके लिए गांव-गांव जाकर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न समितियों से जोड़ने के लिए नए चेहरों की तलाश की और जितने सदस्य समितियों में थे उनके समानांतर अपना पैनल खड़ा कर दिया। लोग इसलिए भी जुड़े, क्योंकि पार्टी इस वक्त केंद्र व राज्य में सत्ता है। सत्ता के आकर्षण का भाजपा ने भरपूर फायदा उठाया। इसका नतीजा यह हुआ कि समितियों में जब नामांकन की बारी आयी तो नए लोगों की आमद देख खुद ही पुराने सदस्यों ने अपने हथियार डाल दिये। हालांकि तमाम समितियों में चुनाव के दौरान काफी हंगामा हुआ। यहां तक कि जैथरा ब्लाक पर फाय¨रग भी हो गयी। गांवों में जो बूथ कमेटियां बनाई गयी थीं उन्हीं को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी कि समितियों के लिए नये सदस्यों को तैयार किया जाये। इसके अलावा भाजपा को बैठे बिठाये एक मुद्दा और हाथ लग गया कि समितियों में सपा समर्थक सदस्य थे उनमें से अधिकांश को इस बार भाग्य आजमाने का मौका इसलिए नहीं मिल पाया, क्योंकि उन्होंने बैंक से कर्ज ले रखा था और उन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया गया था। ऐसे में भाजपा को सैंध लगाने के लिए आसानी से जगह मिल गयी। विधायकों को समितियों के चुनाव भाजपा के पक्ष में लाने की जिम्मेदारी अलग से सौंप दी गयी। इसके अलावा पार्टी के पदाधिकारी और ब्रज क्षेत्र नेतृत्व भी हर गतिविधि की मानीट¨रग करता रहा।

भाजपा की इसी रणनीति का नतीजा है कि आज क्रय विक्रय समिति ब्लाक यूनियन, उपभोक्ता भंडार, आवासीय समितियों , सहकारी संघ, जिला सहकारी बैंक पर भाजपा का कब्जा है। भूपेंद्र ¨सह ने इस सीट पर निर्विरोध जीत दर्ज की है।

Posted By: Jagran

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