जागरण संवाददाता, एटा: बोर्ड परीक्षा 2019 के लिए परीक्षा केंद्र निर्धारण के पहले चरण की प्रक्रिया में स्कूलों का झूठ उजागर हुआ है। स्कूलों की ऑनलाइन दी गईं विभाग को सूचनाओं का सत्यापन हुआ तो पांच दर्जन स्कूलों का झूठ सामने आया है। बायोमैट्रिक या फिर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने के बावजूद स्कूलों ने अपनी सूचना में उनकी उपलब्धता दर्शा दी। प्रधानाचार्य कक्ष व स्कूल की लैब को भी शामिल कर निर्धारित कक्षों की संख्या बढ़ा दी। अब विभाग ने दूसरे चरण की जांच शुरू कराने का निर्णय लिया है।

हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा सात फरवरी से शुरू कराए जाने का कार्यक्रम जारी हो चुका है। इसी के सापेक्ष सितंबर में परीक्षा केंद्रों का निर्धारण पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जुलाई में ही माध्यमिक स्कूलों से वहां उपलब्ध संसाधनों व परीक्षा की व्यवस्थाओं को लेकर निर्धारित प्रारूप पर सूचनाएं मांगीं थीं। पहले तो सूचनाएं देने में ही तमाम वित्तविहीन स्कूलों ने हीलाहवाली की। सूचनाएं दे भी दीं और नोडल अधिकारियों ने स्कूलों में जाकर देखा तो कई ऐसे संसाधन वहां नहीं मिले, जिन्हें कि सूचनाओं में होना बताया। 40 से ज्यादा स्कूल ऐसे निकले, जहां बायोमैट्रिक मशीन नहीं थी, लेकिन उन्होंने सूचना में मशीन होना बताया। सीसीटीवी कैमरों में भी झोल मिला। इंटरमीडिएट परीक्षा के केंद्र के लिए जहां 15 कक्षों का मानक है। वहां निर्धारित कक्ष न होने के बावजूद कक्ष दर्शा दिए गए। डीआइओएस एनडी वर्मा ने बताया है कि सभी स्कूलों का सत्यापन पुन: कराया जा रहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

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