अलीगंज(एटा)जागरण संवाददाता : बीमारियों के मौसम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा सेवाएं हाफ रही हैं। यहां मरीजों की संख्या चार सैकड़ा तक पहुंच रही है। दो संविदा चिकित्सकों के सहारे पूरे बाह्य रोग विभाग की जिम्मेदारी है। खासतौर से बाल रोग विशेषज्ञ व अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को खासी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।

शनिवार को बीते दिन की अपेक्षा भीड़ कुछ कम थी। लेकिन मरीजों की समस्याएं बनी हुई थीं। बीमार बच्चों को गोद में लेकर पहुंचकर कुछ लोग बच्चों के डॉक्टर के बारे में पूछ रहे थे। लेकिन उन्हें बताया गया कि दो ही डॉक्टर हैं, उन्हें दिखाकर दवा ले लो या जिला अस्पताल चले जाओ। कुछ ऐसा ही हाल त्वचा रोगियों का भी था। ओपीडी में केवल संविदा चिकित्सक डॉ. अखलाक अहमद और डॉ. नीतू शाक्य ही मौजूद थीं। भीड़ के दबाव में उन्हें मरीजों की पूरी बात सुनने का मौका भी नहीं मिल पा रहा था। आधी-अधूरी जानकारी लेकर ही ही इलाज लिखा जा रहा था। मरीज भी इस अव्यवस्था से असंतुष्ट नजर आ रहे थे।

इस तरह के हालात लगभग रोज ही रह रहे हैं। 17 सितंबर को नए मरीजों की संख्या 243 थी। जबकि 18 को 380, 19 को 260, 20 को 267 तथा 21 तारीख को 190 नए मरीज ओपीडी में पहुंचे। जबकि सौ से ऊपर पुराने मरीज भी हर दिन आ रहे हैं।

गंदगी और दूषित पानी बनी बीमारियों की वजह

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काशीराम आवासीय कालोनी में दूषित पेयजल और गंदगी बीमारियों की वजह बन गया है। दो दर्जन से अधिक लोग बुखार में तप रहे हैं। तमाम लोगों को त्वचा संक्रमण है। पिछले दिनों बुखार से एक बच्चे की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कॉलोनी में दर्जन दर्जनभर हैंडपंप लगे हुए हैं। लेकिन केवल तीन हैंडपंपों का ही पानी सही है। अन्य सभी का पानी गंदा है। जिसे कुछ रखने पर ही रंग मटमैला पड़ जाता है। पानी में अजीब गंध भी आती है। मजबूरी में लोग इसी पानी को पी रहे हैं। इसके अलावा गंदगी रहने और गंदा पानी जमा होने से मच्छरों का भी प्रकोप बना हुआ है। तमाम लोग मलेरिया के शिकार हैं।

Posted By: Jagran

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