जागरण संवाददाता, एटा: शहर के पथवारी गेस्ट हाउस में चल रही राम कथा में बोलते हुए रामजी भाई ने बताया कि जनकपुरी में सीता स्वयंवर को जीतकर भगवान राम ने अपने शौर्य से सभी राजाओं और राजकुमारों पर अपना अमिट प्रभाव डाल दिया था।।

भगवान के जन्म के बाद से अयोध्या में चारों राजकुमारों के करतबों को देखकर महल में सभी मंत्रमुग्ध हो जाते थे। बाल लीलाओं का रसास्वादन करने को स्वर्ग के देवता भी लालायित हो राजमहल में विभिन्न रूप धरकर आने लगे। जब वे बड़े हुए गुरु विश्वामित्र उन्हें अपने साथ यज्ञ रक्षा के लिए ले गया। जहां से वे जनकपुरी में होने वाले स्वयंवर में भाग लेने के लिए गए। जहां कोई भी राजा या राजकुमार भगवान शिव के धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर हिला तक नहीं सका। ऐसे में गुरु आज्ञा से भगवान राम ने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर महाराज जनक की प्रतिज्ञा को पूरा किया। जिस पर माता सीता ने प्रभु राम के गले में वरमाला डाल दी। कथा में भगवान राम और सीता माता के विवाह प्रसंग पर श्रद्धालु हर्षातिरेक में जयकारे लगाने लगे।

इस मौके पर प्रदीप सक्सेना, पुष्पेंद्र ¨सह, राजेश यादव, शशिकिशोर सक्सेना, उमेश सक्सेना, रतनपाल वर्मा, हरिओम शर्मा, प्रमोद कुमार, हरवेश कुमार, चेतराम ¨सह, वीपी ¨सह, चंपाराम, मोहित ¨सह, अभिनंदन कुमार, गो¨वद कुमार, रुचि यादव, सोनिया, प्रवेंद्र कुमार, रीया गुप्ता, वंशिका चंदशुरिया, हरीशकांत ¨सह, दिवाकर कौशिक, मोहित पचौरी, रेनू गुप्ता मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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