जागरण संवाददाता, एटा: कोरोना संक्रमण के हालात में घर वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र अवागढ़ ने भी पहल की है। कहीं दूर प्रदेशों में बंधुआ मजदूरी के लिए जाने के बजाय घर में ही रहकर अच्छी आमदनी के लिए केंद्र उन्हें प्रशिक्षित करेगा। वहीं उनकी सफलता के लिए उनके साथ खड़ा नजर आएगा।

यहां बता दें कि लॉकडाउन में वापस लौटे प्रवासियों के सामने रोजगार की बड़ी समस्या है। इनमें सबसे ज्यादा मुश्किल है उन प्रवासियों के सामने है जो कि सिर्फ मजदूरी के अलावा किसी भी क्षेत्र में हुनरमंद नहीं है। ऐसे ही प्रवासियों को हुनरमंद बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्लानिग की गई है। वैसे भी प्रधानमंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत के लिए जोर दिया जा रहा है। ऐसे में केवीके की कार्य योजना को प्रवासियों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। मुख्य बात यह है कि हुनरमंद बनने के साथ प्रवासियों के मन से रोजगार पाने के लिए इधर-उधर भटकने जैसी स्थितियों से बचने के साथ डर भी निकल जाएगा।

योजना यह है कि जो प्रवासी हुनरमंद नहीं है उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने से पहले केंद्र द्वारा मुर्गी पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, मशरूम उत्पादन के अलावा कई आमदनी के स्त्रोत जो कि घर पर रहकर ही चलाए जा सकते हैं के लिए प्रशिक्षित करेगा। इसमें कुछ कार्य ऐसे भी हैं जोकि भूमिहीन लोग घर में भी कर सकते हैं। प्रवासियों को प्रशिक्षण के लिए रहने और खाने की व्यवस्था भी की जाएगी। शासन की जुड़ी योजनाओं का भी लाभ प्रशिक्षित उठा सकेंगे। इस दौरान केंद्र द्वारा कुछ ज्यादा प्रवासियों वाले ग्रामों को गोद लेकर स्वरोजगार में भी सहयोग दिया जाएगा। फिलहाल केंद्र प्रशिक्षण की तैयारी तथा प्रवासियों को चिहित कर रहा है। ------

प्रवासियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्लानिग तैयार कर कृषि मंत्रालय को भेज दी गई है। कार्य योजना को स्वीकृतियों का इंतजार है। 30 जून के बाद कार्य योजना पर क्रियान्वयन मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।

-डॉ. मनीष सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र अवागढ़

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