जागरण संवाददाता, एटा : जवाहरपुर तापीय परियोजना के लिए बनाए जा रहे रेलवे ट्रैक की गति काफी धीमी है। अगर इसी तरह धीमी गति से निर्माण कार्य चलता रहा तो पावर प्लांट शुरू होने में काफी देरी होगी। हालांकि परियोजना स्थल के अंदर काम 90 फीसद पूरा हो चुका है, लेकिन परियोजना स्थल के बाहर से लेकर एटा तक काम करने की गति काफी सुस्त है। अब तक यह ट्रैक पूरी तरह बन जाना चाहिए था।

एटा रेलवे स्टेशन से लेकर परियोजना स्थल तक 24 किलोमीटर रेलवे लाइन बिछाई जानी है, ताकि कोयले की आपूर्ति निर्बाध रूप से हो सके। दरअसल कई तरह के व्यवधान भी आ रहे हैं। जैसे कि नगला गोकुल पर वन विभाग की जमीन है, जिससे होकर ट्रैक निकलना है, लेकिन वहां अभी तक अनुमति नहीं मिल सकी। इस वजह से रेलवे लाइन आगे नहीं बढ़ पा रही। जब तक वन विभाग की एनओसी नहीं मिलेगी तब तक वहां निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाएगा। इस जगह पर बजरी, मिट्टी आदि पड़ी हुई है, जिसे एक साल से भी अधिक वक्त हो गया, लेकिन वृक्ष खड़े होने के कारण काम में बाधा आ रही है। प्रोजेक्ट मैनेजर आकाश वर्मा का कहना है कि हम सभी बाधाएं दूर करने की कोशिश कर रहे हैं और प्रयास यह है कि शीघ्र से शीघ्र ट्रैक का काम पूरा हो सके। दो दर्जन किसान नहीं कर रहे बैनामा:

रेलवे ट्रैक के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है, लेकिन दो दर्जन किसान अपनी जमीन का बैनामा नहीं कर रहे, जिसकी वजह से उस जमीन पर ट्रैक अभी तक नहीं बिछाया गया, जबकि यह रजिस्ट्री नहीं होगी तो आगे लाइन नहीं बिछ पाएगी। ट्रैक बनाने के लिए स्लीपर और अन्य सामान यहां पहले से ही एकत्रित कर लिया गया है। अगर सारे व्यवधान समाप्त हो जाएं और एक साथ काम चलने लगे तो ट्रैक बिछाने में अधिक देरी नहीं होगी। सेंटर स्टेशन तक पूरा हुआ काम

गांव सिंहपुर के पास सेंटर स्टेशन बनाया गया है, जहां तक 95 फीसद काम पूरा हो चुका है। अब थोड़ा काम ही बाकी है, लेकिन इस सब से भी काम नहीं चलने वाला, क्योंकि ट्रैक को आगे बढ़ाने के लिए हर बाधा पार करनी होगी।

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