जागरण संवाददाता, एटा : नालों से निकाली जाने वाली सिल्ट नियमित रूप से नहीं उठाई जाती, जिसकी वजह से नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर यह सिल्ट नालों से निकालकर सीधी गाड़ियों से भिजवा दी जाए तो शहर स्वच्छ दिखेगा, लेकिन होता यह है कि बाजारों में एक बार सिल्ट निकालने के बाद कम से कम चार-पांच दिन तक उसे नहीं उठाया जाता।

शहर के अंदर अधिकांश नाले दुकानों के नीचे हैं। बाबूगंज, घंटाघर, बांस मंडी, सब्जी मंडी, मेहता पार्क, गांधी मार्केट जैसे मुख्य बाजारों में सिल्ट सफाईकर्मी बड़ी ही मुश्किलों से निकाल पाते हैं। नगर पालिका के पास सिल्ट निकालने की मशीनें हैं, मगर लोडिग की व्यवस्था कम है। नालों का कीचड़ गीला होता है, इस वजह से उसे निकालकर बाहर डालना पड़ता है, यह कहकर पालिका मजबूरी जता देती है, जबकि अन्य शहरों में यह व्यवस्था है कि पालिका के टैंकरों में पाइप के जरिए सिल्ट लोड की जाती है। अगर यहां भी पर्याप्त गाड़ियां हों तो सिल्ट सीधी उनमें लोड हो सकती है, लेकिन यहां स्थिति यह है कि कई दिन तक सिल्ट के सूखने का इंतजार किया जाता है, तब तक वह फैलकर फुटपाथों को गंदा कर देती है। इस वजह से भी शहर गंदा दिखाई देता है। यहां एक-दो टैंकर हैं जो नालों का पानी जब ओवरफ्लो हो जाता है उसे खींचने के काम ही आते हैं।

अतिक्रमण हटे तो ठीक से होगी सफाई

अगर अतिक्रमण हट जाए तो नालों की सफाई ठीक से हो सकती है। दुकानदारों ने नालों पर छज्जे बना रखे हैं, इस कारण टेल तक जाकर सफाई नहीं हो पाती। कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है, मगर वह सफल नहीं हो पाता। पूर्व में छज्जों की तोड़फोड़ भी की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इस वजह से इस अभियान के कोई मायने नहीं रह जाते। प्रशासन आज तक फुटपाथों से अवैध कब्जे नहीं हटा पाया।

अभियान सिर्फ प्रेरित करने तक सीमित

स्वच्छता अभियान के लिए कई संगठन समय समय पर आगे आते हैं, लेकिन वे सिर्फ एक जगह झाडू लगाकर चले जाते हैं, जबकि आवश्यकता इस बात की है कि जिस क्षेत्र में वे काम कर रहे हैं। उस क्षेत्र के लोगों को इतना जागरूक करें कि वे सफाई के लिए खुद खड़े हों। यह प्रक्रिया अगर नियमित हो जाए तो शहर काफी स्वच्छ दिखाई देगा और रैंकिग में भी अच्छा स्थान मिलेगा। स्वच्छता अभियान के लिए समय-समय पर सामाजिक संगठन सफाई कराते हैं। कार्यकर्ता स्वयं जाकर विभिन्न मुहल्लों में झाडू लगाते हैं, लेकिन यह अभियान सिर्फ प्रेरित करने तक ही सीमित रहे। अगर इन अभियानों को मूर्तरूप देने के लिए हम सब नियमित रूप से सफाई करें तो हर गली-मुहल्ला साफ दिखाई देगा। लोग बोले

जब तक सिल्ट निकालने की उचित व्यवस्था नहीं होगी तब तक अपना शहर गंदा ही दिखाई देगा और स्वच्छता रैंकिग में भी पिछड़ा रहेगा। इसलिए सिल्ट निकालने का प्रबंध करना जरूरी है।

सुशील कुमार हम सब नागरिकों को भी जागरूकता दिखानी चाहिए ताकि स्वच्छता रैंकिग में एटा को अच्छी रैंक मिल सके। प्रशासन से भी आग्रह है कि कई दिन तक सिल्ट सड़कों पर छोड़ दी जाती है इसे रोके।

सतीश चंद्र कुशवाह मैं भी स्वच्छता प्रहरी

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता का जो मंत्र दिया है वह अतुलनीय है। हम सब सफाई अभियान में शामिल होने के बाद अगले दिन सब कुछ भूल जाते हैं। सफाई को आत्मसात करना बहुत जरूरी है। अपने शहर को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी भी हम सभी की है। इसलिए खुद तो जागरूक बनें ही और अन्य लोगों को भी जागरूक बनने के लिए प्रेरित करें।

राजवीर सिंह, सांसद एटा शहर को स्वच्छ बनाने के लिए हम सब अपना फर्ज निभाएं। अपना शहर अगर साफ रहेगा तो बीमारियां नहीं फैलेंगी और हम सब स्वस्थ रह सकेंगे। खुद तो सफाई करें ही औरों को भी प्रेरित करें कि वे अच्छे स्वास्थ्य के लिए सफाई पर विशेष ध्यान दें। स्वच्छता होगी तो संक्रामक रोग नहीं फैलेंगे, इसलिए गंभीरता बरतें।

डा. उमेश चंद्र त्रिपाठी, मुख्य चिकित्साधिकारी, एटा।

Edited By: Jagran