एटा, जासं। शहर में बेसहारा गोवंश के लिए कोई इंतजाम नहीं है। न तो नगरपालिका कान्हा आश्रय स्थल बनवा सकी और न ही कोई अन्य सरकारी गोशाला संचालित है। ऐसे में शहर से सटे गंगनपुर गांव में गो आश्रय स्थल का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें सौ पशुओं को रखने की व्यवस्था होगी। निर्माण पूरा होने पर शहर में घूम रहे बेसहारा गोवंश को वहां पहुंचा दिया जाएगा।

पिछले वर्ष शासन ने हर नगर निकाय में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कान्हा आश्रय स्थल बनवाने के निर्देश दिए। लेकिन जिला मुख्यालय पर इसके लिए जमीन ही न मिल सकी। अन्य कोई सरकारी गोशाला भी नहीं है। बेसहारा पशुओं की संख्या अचानक बढ़ने से कुछ महीने पहले इन्हें जीटी रोड स्थित एक निजी गोशाला में रखवाया गया। लेकिन कम क्षमता की यह गोशाला अतिरिक्त पशुओं का भार नहीं उठा सकी। जबकि प्रशासन और पालिका ने इन पशुओं के भरण-पोषण की व्यवस्था भी नहीं की। ऐसे में पशुओं को छोड़ दिया गया। इसके बाद से तमाम बेसहारा गोवंश सड़कों पर ही नहीं, गली-मुहल्लों में भटकते नजर आ जाते हैं। जो लोगों की समस्या का सबब बने हुए हैं। प्रशासन ने समस्या के हल के रूप में शहर के सीमावर्ती गांव गंगनपुर में एक गो आश्रय स्थल बनवाना शुरू कर दिया है। सितंबर अंत तक इसका निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। वाहिद बीबीपुर में 250 क्षमता का आश्रय स्थल

सकीट ब्लॉक क्षेत्र के गांव वाहिद बीबीपुर में जिलास्तरीय गो संरक्षण केंद्र बनवाया जा रहा है। यह 1.20 करोड़ की लागत से बन रहा है। जिसमें पशुओं के लिए वृहद स्तर पर इंतजाम किए जाएंगे। इसकी क्षमता 250 से 300 पशुओं तक को रखने की होगी। अक्टूबर तक इसका निर्माण भी पूरा होने की उम्मीद है। जिसके बाद यहां भी शहर के पशुओं को रखा जा सकेगा। वर्जन

शहर में कोई गो आश्रय स्थल न होने के कारण अभी बेसहारा पशुओं की समस्या आ रही है। गंगनपुर में जल्द ही आश्रय स्थल बनकर तैयार हो जाएगा। जिसके बाद शहर में विचरण करते बेसहारा पशुओं को वहां पहुंचा दिया जाएगा।

- डॉ. केपी सिंह, सीवीओ

Posted By: Jagran

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