एटा, जासं। जिले में हॉकी का खेल भले ही दो दशक से हाशिए पर हो, लेकिन चार दशक पूर्व हॉकी में ही जिले का गौरव राष्ट्रीय स्तर तक चमक चुका है। आज हालात देखकर भले ही नवोदित खिलाड़ी अपना मनोबल हॉकी के प्रति नहीं बढ़ा पा रहे, लेकिन ज्यादातर अंजान हैं कि एटा के ही श्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ी वासिफ अली रहमानी ने प्रदेश टीम में स्थान बनाकर राष्ट्रीय आयोजन में हॉकी खेलते हुए इस जिले को पहचान दिलाई थी। यही नहीं 1990 में भी शहर के ही अनिल कुमार चतुर्वेदी भी हॉकी की जादूगरी में नाम कमा चुके हैं।

आजादी के बाद राष्ट्रीय खेल के रूप में हॉकी को काफी प्रोत्साहन मिला। युवाओं में जोश था कि यह खेल राष्ट्र की पहचान है। इसमें मेहनत कर प्रतिभा को दूसरे देशों के सामने साबित किया जा सके। जिले में 1965 से ही हॉकी को लेकर युवाओं में काफी जोश था। जीआइसी ही नहीं बल्कि शहर के अन्य स्कूलों के विद्यार्थी इकट्ठे होकर प्रेक्टिस करते। उस समय राजकीय स्कूल के खेल शिक्षक आरएस यादव का प्रशिक्षण युवाओं के काम आया। यहीं के शिक्षक विजयपाल सिंह, मलिखान सिंह ने भी विद्यार्थियों को हॉकी से जोड़ा।

इसी का परिणाम था कि 1971-72 में जीआइसी छात्र वासिफ अली प्रदेश टीम में चयनित हुए और राष्ट्रीय मैच खेला। इसी कारण उन्हें रेलवे में नौकरी भी मिली। कुछ साल बाद पारिवारिक समस्याओं के कारण वह हॉकी से दूर हो गए। 1992 में स्टेडियम में आए हॉकी कोच ने भी मेहनत की तो इसी दरम्यान अनिल कुमार चतुर्वेदी ने भी प्रदेश तक नाम कमाया। इसके बाद हॉकी को आइना दिखाने वाला न मिला और हाल यहां तक आ गया कि जिले में न हॉकी एसोसिएशन है और आधा दर्जन स्कूलों में टीमें तक नहीं। यह कहते होनहार पूर्व खिलाड़ी

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हॉकी के लिए संसाधन तो तब भी नहीं थे, लेकिन लोगों में राष्ट्रीय खेल से लगाव था। 1970 में भी शिक्षकों ने ही संसाधन जुटाए और मेहनत कर प्रशिक्षण दिया। यह प्रोत्साहन ही मेरी ताकत बना कि राष्ट्रीय हॉकी तक पहुंचा। अब भी प्रयास हों तो यहां हॉकी के धुरंधर सामने आ सकते हैं।

Posted By: Jagran

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