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एटा में यूको बैंक के पूर्व प्रबंधक को चेक बाउंस में दो साल की जेल, 5.50 लाख का जुर्माना

By Anil Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Tue, 15 Sep 2026 08:26 PM (IST)

एटा की अदालत ने यूको बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक अच्युतकांत त्रिपाठी को चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराया है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. यूको बैंक के पूर्व प्रबंधक को चेक बाउंस में सजा।

  2. एटा कोर्ट ने पूर्व प्रबंधक को दो साल जेल, 5.50 लाख जुर्माना।

  3. अर्थदंड की राशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में मिलेगी।

जागरण संवाददाता, एटा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में यूको बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक अच्युत उर्फ अच्युतकांत त्रिपाठी को दोषी पाते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त पर 5.50 लाख रुपये के अर्थदंड के साथ चेक की धनराशि पर 18 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी लगाया है। अर्थदंड की पूरी राशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में दिए जाने के आदेश दिए गए हैं।

पीड़ित आकाश यादव निवासी वर्मा नगर की ओर से परिवाद दाखिल किया था, उसके अनुसार यूको बैंक की एटा शाखा में खाता संचालित था। उसने 31 जनवरी 2023 को बैंक से 12 लाख रुपये का होम लोन लिया था और नियमित रूप से किस्त जमा कर रहा था

उस समय अच्युतकांत त्रिपाठी बैंक शाखा में प्रबंधक के पद पर तैनात थे। पीड़ित ने 5.90 लाख रुपये का टापअप लोन भी कराया था। मामले में चेक भुगतान को लेकर विवाद हुआ और पीड़ित ने धारा 138 के तहत न्यायालय में परिवाद दाखिल किया।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को चेक बाउंस के अपराध में दोषी माना। न्यायालय ने आदेश दिया कि 5.50 लाख रुपये की धनराशि वाद दायर किए जाने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 18 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की गणना के अनुसार राशि अदा करनी होगी

अर्थदंड जमा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह अतिरिक्त सजा अर्थदंड की देनदारी को समाप्त नहीं करेगी। फैसले में न्यायालय ने अभियुक्त के आपराधिक इतिहास का भी उल्लेख किया। आदेश के अनुसार उसके खिलाफ धोखाधड़ी, गबन, जालसाजी और अन्य धाराओं में कई मुकदमे विचाराधीन हैं।

न्यायालय ने बैंक प्रबंधक पद पर रहते हुए पद का दुरुपयोग करने के आरोपों को भी सजा निर्धारित करते समय गंभीरता से लिया। जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया गया है।