जासं, एटा: गलन भरी ठंड लोगों को ठिठुरने के लिए मजबूर कर रही है। साथ ही कम तापमान और कोहरा सांस रोगियों के लिए मुसीबत बन गया है। प्रदूषण के कण सांस में जा रहे हैं जो अस्थमा, ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। इससे संबंधित रोगियों की संख्या सरकारी अस्पताल व निजी चिकित्सकों के पास बढ़ गई है।

सांस के पुराने रोगी अधिक परेशान हो रहे हैं। हफ्ते भर से सांस के रोगियों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन इस तरह के 80 से 100 रोगी पहुंच रहे हैं। सामान्य तौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र वालों को इन बीमारियों का खतरा होता है। इन मरीजों को धूल, धुआं, ठंडा और नम मौसम, कोहरे से संक्रमण के कारण फेफड़ों में आने वाली रुकावट के चलते सांस लेना भारी पड़ता है। जिला अस्पताल के परामर्शदाता डा. एस चंद्रा ने बताया कि सर्दियों में श्वांस नलियां सिकुड़ जाती हैं और कफ भी ज्यादा बनता है। ठंडे मौसम के कारण धुआं और वातावरण में घुले तत्व ऊपर आसमान में नहीं जा पाते जो सांस के जरिए अंदर जाकर परेशानी पैदा करते हैं। इसलिए श्वांस रोगों की समस्या सर्दियों में ज्यादा बढ़ जाती है। इस तरह के रोगी सर्दी और वायु प्रदूषण से बचाव रखें। बरतें सावधानी:

- खांसी-जुकाम प्रभावित लोगों के संपर्क में न रहें।

- धूम्रपान और अधिक धुएं वाली जगह से परहेज करें।

- नियमित व्यायाम करें और शुद्ध वातावरण में रहें।

- हरी सब्जियों और पौष्टिक आहार का सेवन करें।

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