जागरण संवाददाता, एटा: कितने कमाल की बात है कि तीन पुलिस कर्मी वैन में बैठे रहे और दो बंदियों ने जिस हथकड़ी में रस्सी बंधी थी उसे ही काट डाला। सवाल यह है कि आखिर यह पुलिस कर्मी कहां थे और उनका ध्यान बंदियों की ओर क्यों नहीं था। या फिर जानबूझकर लापरवाही बरती गई। यह कई ऐसे सवाल हैं जो वैन में से कूदकर बंदियों के भागने की घटना से निकलकर सामने आए हैं और इनका जवाब अभी तक अनुत्तरित बना हुआ है।

गाड़ी चालक को वापस फतेहगढ़ पुलिस लाइन भेज दिया गया, जहां उसने आरआइ को जाकर पूरा घटनाक्रम बताया। उसने जानकारी दी कि तीनों पुलिस कर्मी राजीव, कृष्ण कुमार और सुधीर कुमार बंदियों के साथ वैन में ही बैठे थे। उनसे बंदियों की बातचीत भी हो रही थी, फिर भी उन्होंने रस्सी काट दी और पुलिस कर्मियों को इस बारे में पता ही नहीं चल सका, यह बात किसी को भी हजम नहीं हो रही। सड़क पर गड्ढे भी हैं, गाड़ी काफी हिलती-डुलती हैं, फिर भी पुलिस कर्मी गच्चा खाते रहे। हां इतना जरूर है कि गाड़ी के अंदर की लाइटें बुझी हुई थीं।

इस पूरे मामले में एक नहीं कई लापरवाही हैं। गाड़ी की खिड़कियों को लॉक करके नहीं रखा गया क्योंकि अगर ऐसा होता तो वे खिड़की खोलकर कूद नहीं पाते। दरअसल पूर्व में कई घटनाएं ऐसी हुई हैं जिसमें पुलिस कर्मी बंदियों को प्राइवेट गाड़ियों में पेशी के दौरान घुमाते हुए मिले हैं। एटा जनपद में ही तीन मामले दो साल में पकड़ में आ चुके हैं। इसके अलावा अक्सर यह देखने को मिलता है कि बंदियों को पेशी पर लाते वक्त उन्हें होटलों में खाना खिलाया जाता है, पान, बीड़ी, गुटखा खरीदने के लिए पुलिस कहीं भी किसी भी दुकान पर उन्हें लेकर खड़ी हो जाती है।

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