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पुरुषों में भी मिल रहे स्तन कैंसर के लक्षण, एटा में दरोगा समेत तीन केस में पुष्टि

By Anil Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 18 Sep 2026 11:47 PM (IST)

एटा मेडिकल कॉलेज की साइटोलॉजी लैब में जनवरी से अब तक 400 से अधिक गांठों की जांच हुई है, जिनमें ...और पढ़ें

साइटोलाजी लैब की सीनियर रेजीडेंस डा. रेखा जैन।

साइटोलाजी लैब की सीनियर रेजीडेंस डा. रेखा जैन।

जागरण संवाददाता, एटा। मेडिकल कालेज की साइटोलाजी लैब में शरीर के विभिन्न हिस्सों में बनने वाली गांठों की जांच का दायरा बढ़ा है। जनवरी से अब तक 400 से अधिक मरीजों की गांठों की जांच की जा चुकी है। इनमें 50 से अधिक मरीजों में कैंसर की पुष्टि हुई है।

खास बात यह है कि महिलाओं के साथ पुरुषों के स्तनों में भी कैंसर के लक्षण सामने आ रहे हैं। एक दारोगा समेत तीन पुरुषों में स्तन की गांठ की जांच के दौरान कैंसर की पुष्टि हुई है।

चिकित्सकों के अनुसार पुरुषों में स्तन कैंसर अपेक्षाकृत कम पाया जाता है, लेकिन गांठ बनने पर इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। मेडिकल कालेज में जांच के लिए आने वाले मरीजों में कई ऐसे भी होते हैं, जिनके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लंबे समय से गांठ बनी होती है

जांच के बाद उसकी प्रकृति स्पष्ट होने पर आगे के उपचार की दिशा तय की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में बनने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती। हालांकि यदि गांठ तेजी से बढ़ रही हो, आकार में सख्त हो, आसपास के ऊतक से चिपकी महसूस हो या इसके साथ भूख कम लगने तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

समय पर जांच होने से संदिग्ध गांठ की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। साइटोलाजी लैब में गांठ से कोशिकाओं का नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है।

गांठ को न करें नजरअंदाज

साइटोलाजी लैब की सीनियर रेजीडेंस डा. रेखा जैन ने बताया कि शरीर में किसी भी तरह की गांठ को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पुरुषों के स्तन में गांठ होने पर भी जांच कराना जरूरी है।

तीन मामलों में कैंसर की पुष्टि हुई है। समय पर जांच से संदिग्ध कोशिकाओं की पहचान की जा सकती है और जरूरत के अनुसार मरीज को आगे के उपचार के लिए भेजा जाता है।

यह हैं लक्षण

  • छाती, निप्पल के पीछे या कांख (अंडरआर्म) में सख्त और ठोस गांठ।
  • निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना (उल्टा होना) या उसका आकार बदलना।
  • निप्पल से खून या अन्य तरल पदार्थ का डिस्चार्ज होना।
  • छाती की त्वचा पर गड्ढे पड़ना, सिकुड़न आना, लालिमा या संतरे की त्वचा जैसा सख्त होना।
  • निप्पल या उसके आसपास की त्वचा पर लगातार रहने वाला घाव या पपड़ी बनना।