एटा: चारागाह भूमि पर लगाई जा रही नेपियर घास, सालभर मिलेगा पशुओं को पौष्टिक हरा चारा
एटा में उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश को सालभर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध ...और पढ़ें

चारागाह की जमीन पर नैपियर घास लगाते श्रमिक।
जागरण संवाददाता, एटा। उप्र चारा नीति के तहत जिला में संचालित गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशी को वर्षभर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराने की पहल शुरू की गई है। इसके तहत प्रथम चरण में 10 गो आश्रय स्थलों से संबद्ध चारागाह भूमि पर नेपियर घास की रोपाई कराई जा रही है।
प्रत्येक गो आश्रय स्थल पर 0.2 हेक्टेयर चारागाह भूमि में नेपियर घास लगाई जाएगी। योजना के तहत प्रत्येक चयनित गो आश्रय स्थल के लिए 6000 नेपियर रूट्स स्टेम की निशुल्क आपूर्ति राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र बाबूगढ़ हापुड़ से की गई है।
इनकी रोपाई के लिए पशुपालन विभाग की ओर से प्रत्येक गो आश्रय स्थल के बैंक खाते में चार हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। इसका उपयोग चारागाह भूमि की जुताई, रोपाई और अन्य संबंधित कार्यों में किया जाएगा। विभाग के अनुसार नेपियर घास बहुवर्षीय चारा है।
एक बार रोपाई करने के बाद इसकी फसल कई वर्ष तक चारा उपलब्ध करा सकती है। इससे गो आश्रय स्थलों में हरे चारे की उपलब्धता बनी रहेगी और बार-बार नई फसल तैयार करने की जरूरत कम होगी। पौष्टिक हरा चारा मिलने से संरक्षित गोवंशी के स्वास्थ्य में भी सुधार की उम्मीद है। साथ ही चारागाह भूमि का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
सीवीओ डा. आरपी शर्मा ने बताया कि प्रथम चरण में भदुआ, चाटी रफीपुर, पमास, मलावन, वाहिद बीबीपुर, किन्नौरी खेराबाद, नावली, पैदापुर, महान मई और जैनपुरा स्थित गो आश्रय स्थलों का चयन किया गया है। इन सभी स्थलों से संबद्ध चारागाह भूमि पर नेपियर घास की रोपाई कराई जा रही है।
विभाग की योजना के अनुसार आगे अन्य गो आश्रय स्थलों से संबद्ध चारागाह भूमि पर भी चरणबद्ध तरीके से नेपियर घास लगाई जाएगी। इससे जिले के गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशी के लिए वर्षभर हरे चारे की व्यवस्था मजबूत होगी।
बताया कि उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत गो आश्रय स्थलों से संबद्ध चारागाह भूमि पर नेपियर घास की रोपाई कराई जा रही है। इसका उद्देश्य गोवंशी को वर्षभर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराना है।
