जागरण संवाददाता, एटा: मौसम में आ रहे परिवर्तन के साथ ही बीमारियों ने चौतरफा हमला कर दिया है। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ नजर आ रही है। अकेले जिला अस्पताल में ही हर रोज डेढ़ हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक हालात वायरल संक्रमण, टायफाइड और मलेरिया बिगाड़ रहे हैं। जबकि डेंगू और चिकनगुनिया का भी खतरा मंडरा रहा है।

बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी और पेथोलॉजी लैब में पैर रखने को जगह नहीं थी। पंजीकरण कक्ष से लेकर चिकित्सकों के कक्ष तक लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। पूरे दिन में 1692 नए रोगियों ने पंजीकरण कराए। जबकि पुराने रोगियों की संख्या भी 500 से अधिक रही। इनमें सर्दी जुकाम, खांसी और वायरल फीवर के मरीज सबसे अधिक थे। कुल 270 लोगों की खून की जांचें कराई गईं। इनमें टायफाइड के 20 और मलेरिया के चार मरीज पाए गए। चार लोगों की हालत अधिक गंभीर होने की स्थिति में उन्हें अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के अलावा निजी चिकित्सकों के क्लीनिक और कस्बाई सरकारी अस्पतालों में भी खासी भीड़भाड़ रही। पैथोलॉजी लैब्स पर भी सुबह से शाम तक टे¨स्टग कराने वालों की भीड़ बनी रही। जिला अस्पताल के डॉ. एस. चंद्रा और डॉ. मनोज गुप्ता ने बताया कि इस समय सबसे अधिक मरीज मलेरिया और टायफाइड के आ रहे हैं। मलेरिया का सही उपचार न होने की स्थिति में मरीज में पीलिया के लक्षण भी पनप जाते हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी. सागर ने बताया कि जांचों के इंतजाम सहित एंटीबायटिक व अन्य जरूरी दवाओं की पूरी उपलब्धता है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एके सक्सेना ने बताया कि इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से व्यक्ति जल्दी ही बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। डायरिया, मौसमी बुखार, मलेरिया की समस्याएं सर्वाधिक होती हैं। यह जरूरी है कि समय पर बीमारी की पहचान और इलाज करा लिया जाए। अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है।

बच्चे भी बीमारियों की चपेट में

मौसम और बीमारियों का असर बच्चों पर भी नजर आ रहा है। तमाम बच्चे वायरल संक्रमण के अलावा टायफाइड और मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल सहित शहर के बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों के क्लीनिकों पर हरदम भीड़ दिख रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सक्सेना ने बताया कि बच्चों के लिए यह मौसम परेशानियों भरा होता है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा कम होती है। जिसके चलते वे बीमारियों की जद में आसानी से आ जाते हैं। उनके रहन-सहन, खानपान और स्वच्छता को लेकर काफी एहतियात बरतने की जरूरत है।

Posted By: Jagran