जागरण संवाददाता, एटा: कोरोना को लेकर हालात बेकाबू हो चुके हैं। चाहते हुए भी इस पर काबू नहीं पाया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन सभी व्यवस्थाएं बनाने में जुटे हैं, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पा रही।

प्रतिदिन औसतन 200 मरीज कोरोना से संक्रमित निकल रहे हैं। इनमें से अधिकांश को होम आइसोलेट किया जाता है। कुछ लोग ही बागवाला के एल-टू हास्पीटल में भेजे जाते हैं। ऐसी स्थिति में होम आइसोलेट लोगों की हालत जब गंभीर हो जाती है, तो उन्हें तत्काल उपचार नहीं मिल पाता। बाजार में दवाओं का टोटा है। जो दवाएं आवश्यक हैं, पर्याप्त नहीं मिल पा रहीं। ऐसे हालातों में कोरोना पर कैसे काबू पाया जाए, इस बात को लेकर सब परेशान हैं। हालांकि प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रखी हैं, लेकिन उनसे काम नहीं चल पा रहा। पर्याप्त नहीं हो पा रहा वैक्सीनेशन

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वैक्सीनेशन पर्याप्त संख्या में नहीं हो पा रहा। अभी तक एक लाख लोगों के भी टीके नहीं लगाए गए। जब तक पर्याप्त मात्रा में वैक्सीनेशन नहीं होगा, तब तक कोरोना से बचाव हो पाना मुश्किल है। स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीनेशन के लिए टारगेट फिक्स कर रखा है। बमुश्किल 1200 लोगों के ही प्रतिदिन वैक्सीन लगाई जा रही है, जबकि आवश्यकता इससे बहुत ज्यादा है। लोग बरत रहे लापरवाही

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कोरोना की चेन तोड़ने के लिए यह बहुत जरूरी है कि कोई लापरवाही न बरते। लेकिन लापरवाही बड़े पैमाने पर दिखाई दे रही है। संक्रमण को लेकर तमाम लोग इतने लापरवाह हैं कि अभी भी मास्क लगाने से परहेज कर रहे हैं। वे चालान भुगतने के लिए तैयार हो जाते हैं। पर मास्क लगाना उचित नहीं समझते। यह लापरवाही खतरे में डाल सकती है। ऐसी स्थिति लड़कों में आसानी से देखने को मिल जाएगी। पंचायत चुनाव के कारण भी बढ़ा कोरोना पंचायत चुनाव में जिस तरह से लापरवाही बरती गई, उससे भी कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी है। क्योंकि चुनाव में लोगों ने मास्क नहीं लगाए और प्रचार में जुटे रहे। इस कारण मरीज बढ़ते गए। आज वही संक्रमण लोगों के बीच फैल रहा है।