एटा, जासं। चटख धूप, उमस और लू के गर्म थपेड़ों ने पटरी पर कारोबार करने वालों को भी झुलसा दिया है। पटरी वालों के यहां ग्राहकों का टोटा है और पेट पर मार पड़ रही है। शनिवार को भी बढ़ते ताप की मार इन छोटे कारोबारियों को झेलनी पड़ी। यहां तक कि दोपहर के वक्त वे छांव के लिए ठौर तलाशते दिखते हैं। इस बीच तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रहा।

दरअसल व्यापारियों में भी एक वर्ग ऐसा है जिसे इन प्राकृतिक कठिनाइयों से रोज ही रूबरू होना पड़ता है। ऐसे व्यापारी कोई और नहीं, सड़क किनारे फड़ लगाकर अस्थाई व्यापार करने वाले पटरी व्यवसाई हैं। आजीविका चलाने तथा पूरे कुनबे का पेट भरने की मजबूरी के चलते मौसम की बेरुखी से कभी यह तबका नाराज नहीं होता। एक हाथ में पंखा और दूसरे हाथ से ग्राहक को सामान देना उनकी प्राय: नित्य की दिनचर्या मे शुमार है। जब मई जून की तेज धूप तथा गर्म हवाओं का रुख आड़ व छांव लेने को विवश करता है, तब भी पटरी व्यवसाई ग्राहक के इंतजार में बैठे रहते हैं। इनमें जूतों की सिलाई, पॉलिश, साधारण खिलौने, कपड़ों पर स्त्री, सिलाई दर्जी, फड़ व्यापारी, मूंगफली-चना भुर्जी, घड़ी-टार्च और हथठेल व्यापारी भी धूप की तपिश तथा लू के गर्म थपेड़ों से जूझने को विवश हैं। वे ग्राहकों के इंतजार में दिनभर इस उम्मीद में बैठे रहते हैं कि शायद उनकी रोटी की जुगाड़ होगी। मगर पूरी दुपहरी उनकी इस इंतजार में ही व्यतीत हो जाती है। ग्राहक नहीं आते।

क्या कहते हैं पटरी व्यापारी

----------------

- शहर में पटरी व्यापारियों के लिए अलग से छांव वाले स्थल की कोई व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वहां बैठकर वे सुकून से व्यापार कर सकें। मनोज कुमार

- नगर में पालिका के चुनाव दौरान दावे तो बहुत किए गए, मगर हम पटरी व्यापारियों के लिए आज तक कुछ व्यवस्था नही की जा सकी है। राजेंद्र कुमार

- पटरी पर सामान को बिक्री के लिए यदि धूप से बचाव को छांव के लिए छतरी आदि लगा लेते हैं तो उन्हे परेशान किया जाता है। इसरार अहमद

- पालिका प्रशासन द्वारा पटरी फड़ व्यापारियों के लिए मौसम की मार से बचाव को स्थाई स्थल की शहर में व्यवस्था की जानी चाहिए। लालसिंह

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस