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एटा: सपा कैसे जीतेगी विधानसभा चुनाव 2027 में सीटें? संगठन भंग कर अखिलेश ने दिया झटका, इतनी जल्दी नया बनाना चुनौती

Published: Sun, 20 Sep 2026 10:09 AM (IST)Updated: Sun, 20 Sep 2026 10:23 AM (IST)

सपा ने लखनऊ में बैठक के बाद एटा और कासगंज की जिला इकाइयों को भंग कर दिया है, जिससे पार्टी ...और पढ़ें

अखिलेश यादव।

अखिलेश यादव।

HighLights

  1. लखनऊ बैठक के बाद एटा-कासगंज सपा इकाइयां भंग की गईं।

  2. आपसी गुटबाजी के कारण पार्टी नेतृत्व ने यह निर्णय लिया।

  3. 2027 चुनाव से पहले नया संगठन बनाना बड़ी चुनौती।

जागरण संवाददाता, एटा। लखनऊ में शनिवार को पार्टी सुप्रीमो की बैठक के बाद एटा और कासगंज की सपा जिला इकाइयों का भंग किए जाने से पार्टी के पदाधिकारियों को झटका लगा है। चुनाव से पहले नए संगठन को गठित करना चुनौती साबित होगा। वहीं संगठन में जगह पाने के लिए होड़ भी शुरू हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों जिलों की सात विधानसभा सीटों में से केवल एक पर पार्टी जीत हासिल कर पाई थी। हालांकि लोकसभा चुनाव में पार्टी ने भाजपा को जोर का झटका दिया था।

पार्टी के कोर वोट बैंक माने जाने वाले यादव और मुस्लिम वोटों के गणित के चलते दोनों जिले एक जमाने में सपा का गढ़ रहे हैं। सपा संस्थापक मुलायम सिंह और सैफई परिवार के रिश्ते भी यहां थे।

सात विधानसभा सीटों में लगाई थी भाजपा ने सेंध

2007 विधानसभा चुनाव से पहले एटा और कासगंज की सातों विधानसभा सीटें सपा के खाते में रहती थी। इसके बाद भाजपा ने वोटों में सेंध लगाना शुरू किया और गढ़ दरकने लगा। 2017 में सपा की सीटों पर भाजपा का कब्जा होना शुरू हो गया। 2022 के चुनाव में कासगंज की पटियाली विधानसभा सीट पर नादिरा सुल्तान को छोड़कर कोई भी प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर पाया।

लखनऊ में तकरार के बाद कार्यकर्ताओं को लगा झटका

2027 के चुनाव को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव पूरी तैयारी कर रहे थे। इसके लिए शनिवार को लखनऊ में दोनों जिलों के नेताओं की बैठक बुलाई गई थी। माना जा रहा है कि इस फीडबैक के आधार पर ही प्रत्याशियों का चयन किया जाना था। मगर, दो नेता इस तरह भिड़े कि सब कुछ बिगड़ गया। स्थानीय गुटबाजी को देखकर पार्टी नेतृत्व में सभी संगठन भंग करते हुए नए सिरे से गठन की तैयारी शुरू कर दी है।

नया संगठन खड़ा करने की होगी चुनौती

सक्रिय कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि नई टीम में पुराने पदाधिकारियों को मौका मिलेगा या पूरी तरह नए चेहरों के साथ संगठन तैयार किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व के सामने एक और चुनौती गुटबाजी को नियंत्रित करने की होगी। संगठन में बदलाव के बाद यदि अलग-अलग खेमों को साथ लाने में सफलता मिलती है तो चुनावी तैयारियों को नई दिशा मिल सकती है। इसके विपरीत पद और टिकट की दावेदारी को लेकर खींचतान बढ़ी तो इसका असर बूथ स्तर तक पहुंच सकता है।

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संगठन के लिए होगी खींचतान

सपा इस समय प्रदेश में 2027 के लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और अपने सामाजिक आधार का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में एटा-कासगंज में संगठन का अचानक पुनर्गठन स्थानीय इकाइयों के लिए भी परीक्षा की घड़ी है।

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