देवरिया : रासायनिक उर्वरक पर निर्भर किसानों को जैविक उर्वरक पर निर्भर बनाने के लिए सरकार ने राजस्व गांवों में वर्मी कंपोस्ट बीट का निर्माण कराने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत जिले को 2019 राजस्व गांवों में एक-एक वर्मी कंपोस्ट बीट का निर्माण कराने का लक्ष्य आवंटित किया गया है। इसमें जिस श्रेणी का प्रधान होगा उसी श्रेणी के लाभार्थी को योजना का लाभ दिया जाएगा। अनुदान के रूप में इस पर 1.21 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

योजना के तहत अधिक से अधिक पैदावार करने के लिए जैविक उर्वरक का प्रयोग करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिले की 2019 राजस्व गांवों में वर्मी कंपोस्ट बीट का निर्माण हर साल एक कराया जाएगा। इस बार राजस्व गांवों में जिस वर्ग का प्रधान होगा। उसी वर्ग के लाभार्थी को दिया जाएगा। एक वर्मी कंपोस्ट बीट के निर्माण पर आठ हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें लाभार्थी को 25 फीसद यानी दो हजार रुपये अंशदान देना होगा। बाकी 75 फीसद यानी छह हजार रुपये अनुदान के रूप में सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में अंतरित किया जाएगा। लाभार्थी को अपना पैसा लगाकर उसका निर्माण कराना होगा। निर्माण होने के बाद लाभार्थी को फोटो खींचकर रसीद के साथ लगाना होगा। इसके बाद विभाग उसका सत्यापन करके अनुदान की धनराशि छह हजार रुपये खाते में प्रेषित करेगा।

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वर्मी कंपोस्ट बीट निर्माण का मानक

देवरिया : शासन ने वर्मी कंपोस्ट बीट के निर्माण का मानक निर्धारित किया है। इसमें बीट की लंबाई सात फीट, चौड़ाई तीन फीट तथा एक फीट ऊंचा होगा। इसके ऊपर टीनशेड डाला जाएगा। ताकि धूप व पानी सीधे बीट में न पड़े। पिट तैयार होने के बाद इसमें चार इंच छोड़कर गोबर से भर दिया जाएगा। इसके बाद पंद्रह दिन बीतने के बाद इसमें दो किग्रा केचुआ डाला जाएगा। जब केचुआ उस गोबर को वर्मी कंपोस्ट बना देंगे तो किसान वर्मी कंपोस्ट चार इंच छोड़कर निकाल लेंगे। इसके बाद उसमें गोबर डाल देंगे।

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योजना के तहत जिले में 2019 राजस्व गांवों में बीट का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें लाभार्थी को दो हजार रुपये अंशदान के रूप में लगाना होगा। छह हजार रुपये अनुदान के रूप में सरकार डीबीटी के माध्यम से खाते में सीधे भेजेगी।

-पीसी वर्मा, विषय वस्तु विशेषज्ञ

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By Jagran