देवरिया: जिला चिकित्सालय में दो कंपनियों की हजारों खराब गोलियां मरीजों के बीच वितरित कर दी गईं। हालांकि यह कार्य जिला अस्पताल ने जानकारी में नहीं किया लेकिन गैर जानकारी में ही यह कार्य अस्पताल प्रशासन से हो गया। स्वास्थ्य प्रबंधक गुणवत्ता की सूचना आने के बाद दवाओं के वितरण पर रोक लगाई गई। दवाओं को सीएमएस ने अलग रखवाया है।

जिला चिकित्सालय में दवाओं की सप्लाई लखनऊ से आ रही है। जिला अस्पताल से दवाओं की डिमांड भेजी जाती है और उसके अनुसार लखनऊ कार्पोरेशन से दवाओं की सप्लाई आती है। लखनऊ से हिमालया मेडिटेक प्राइवेट लिमिटेड और ग्रेम्पस लैबोरिटरीज इंडस्ट्रीयल ने इंजेक्शन, परमेथ्रिन क्रीम, न्यूमाइसीन पाउडर, एडेनालिन इंजेक्शन, टेबलेट समेत पांच दवाओं की सप्लाई की गई थी। इन दवाओं को औषधि विभाग ने जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा था। जिसमें पांच दवाओं के नमूने फेल हो गए। रिपोर्ट आने के पूर्व दवाओं की सप्लाई कर दी गई थी। मरीजों के बीच कई दिनों से दवाओं का वितरण किया जा रहा था।

सूचना मिलने के बाद सीएमएस ने अस्पताल से इन दवाओं के वितरण पर रोक लगा दी। उसके बाद आनन-फानन में दवाओं को दवा वितरण कक्ष, आपरेशन थियेटर से हटा कर एक स्थान पर रखवाया गया है। वितरण रोकने का आदेश मिलने से पूर्व हजारों गोलियां मरीजों के बीच वितरित कर दी गई। उधर दवाओं के वितरण पर रोक लगाते हुए तीन वर्ष के लिए दोनों कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड करने का निर्देश दिया गया है।

सीएमएस डा. छोटेलाल ने कहा कि पांच दवाओं का नमूना फेल होने व वितरण पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया। उसे तत्काल प्रभावी ढंग से लागू किया गया। फिर भी कुछ दवाएं वितरित हो गई थीं।

Posted By: Jagran

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