देवरिया: एसटीएफ टीम बुधवार को करीब तीन घंटे तक बीएसए कार्यालय में जमी रही। फर्जी अभिलेख के आधार पर नौकरी हथियाने के शक में 15 शिक्षकों व वीआरएस लेने वाले चार शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित अभिलेख मांगे। वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लिपिकों से पैन कार्ड आदि का ब्योरा भी लिया। एसटीएफ के निशाने पर अब एडेड विद्यालयों के फर्जी शिक्षक भी आ गए हैं। 200 शिक्षक जांच की जद में हैं। एसटीएफ अभिलेखों के सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

एसटीएफ इकाई गोरखपुर के प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम दोपहर 2.30 बजे बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने शिक्षकों की नियुक्ति, मान्यता व वीआरएस पटल देखने वाले लिपिकों को एक-एक कर बुलाया और उनसे पूछताछ की। वीआरएस लेने वाले चार शिक्षकों के नियुक्ति संबंधी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा सके। पटल देखने वाले लिपिक दिनेश्वर ने उन्हें बताया कि मूल अभिलेख लेखाधिकारी या खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिल सकता है। बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव की मौजूदगी में लिपिकों ने अभिलेख उपलब्ध कराए। वहीं वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लिपिक से पैन कार्ड, वेतन आहरण संबंधी जानकारी ली। कई जनपदों से जुड़े हैं देवरिया के तार

पूर्वी उप्र समेत कई जनपदों में फर्जी शिक्षकों का जाल फैला है। अधिकतर जनपदों के तार देवरिया से जुड़े हैं। सिद्धार्थनगर, संतकबीनगर, महराजगंज, अंबेडकरनगर, गोरखपुर में पकड़े गए कई फर्जी शिक्षक देवरिया के रहने वाले थे। एसटीएफ ने तीन माह पूर्व गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारी मिली थी। वहीं एसटीएफ के पास फर्जी अभिलेखों के आधार पर शिक्षक के पद पर नौकरी करने की शिकायतें बढ़ रही हैं। इनमें कई शिकायतें झूठी भी मिल रही हैं।

Posted By: Jagran

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