देवरिया : पाक रमजान माह चल रहा है। ईद का पर्व नजदीक है। रोजेदार रोजा रखने के साथ ही ईद को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि खुदा तीस दिन भूखे प्यासे रहने वाले लोगों के लिए एक दिन खुशी का बख्शता है वह दिन ईद का होता है। माह रमजान पर मुस्लिम समाज के गणमान्य लोगों की प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने दिल खुलकर अपनी बात रखी।

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चित्र परिचय: 4 डीईओ-21 जेपीजी।

रमजान का महीना सभी महीनों में अफजल महीना है। इस माह में खुदा की रहमत बरसती है। रोजा अल्लाह की रजा के लिए रखा जाता है। इसी महीने में कुरान शरीफ भी उतारी गई थी।

-बिस्मिल्लाह लारी, पूर्व सदर अंजुमन इस्लामिया

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चित्र परिचय: 4 डीईओ-24 जेपीजी।

रमजान माह में रोजा रखने के दौरान प्रात: सेहरी करते हैं और शाम को निर्धारित समय पर इफ्तार करते हैं। चंद्र दर्शन के अनुसार ईद होता है। रोजेदार ईद को पूरे उल्लास के साथ मनाते हैं।

-मु.निजामुद्दीन, मोहज्जिम जामा मस्जिद, देवरिया

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चित्र परिचय: 4 डीईओ-23 जेपीजी।

रमजान माह में जो भी व्यक्ति रोजा रखता है उस पर खुदा की विशेष रहमत होती है। ईद में हम अपने धन का ढाई फीसद जकात निकालते हैं, जिसे गरीबों में बांटा जाता है। इस धन से गरीब भी अपना त्योहार मना सके अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

-मोहम्मद अहमद, मौलाना, जामा मस्जिद, देवरिया

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चित्र परिचय: 4 डीईओ-22 जेपीजी।

जब कोई अमीर व्यक्ति रोजा रखता है तो दिन में वह भूख और प्यास को बर्दाश्त करता है। ऐसे में उसे भी पता चलता है भूख और प्यास का क्या मतलब होता है और तक अमीर व्यक्ति गरीबों की खुल कर मदद करने लगते हैं। इस्लाम कहता है अगर पड़ोसी भूखा है तो हमारा खाना हराम है।

-शकील अहमद सिद्दीकी, सदर अंजुमन इस्लामिया, देवरिया

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Posted By: Jagran