जागरण संवाददाता खुखुंदू देवरिया: वर्षा जल संचयन की एक सोच से गांव के बदहाल पोखरे को नया जीवन मिल गया, जिसका नतीजा यह है कि वह पोखरा पशु पक्षियों की प्यास बुझा रहा है।यह तालाब पांच सौ साल पुराना है।

भलुअनी विकासखंड क्षेत्र के खुखुंदू स्थित पोखरा दो एकड़ में है। एक दशक पूर्व यह पोखरा जलकुंभी से बदहाल था। इसी बीच नथुन राय ने पोखरों को पट्टे पर लेकर पोखरे की साफ सफाई व मेड़बंदी कराई। जिसका नतीजा यह रहा कि पोखरे में वर्षा का जल संचयन हुआ। इस वक्त पोखरे में पानी लबालब भरा हुआ है। पोखरे में पशु- पक्षियों के अलावा जलीय जीवों के लिए यह पोखरा जीवनदायिनी बन गया है। पोखरा कभी सूखता नहीं है। वजह मेड़बंदी इस तरह से किया गया है कि बारिश का पानी बाहर न जा सके।

वर्षा जल संचयन का दूसरा फायदा यह हुआ कि गांव का भूजलस्तर ठीक हो गया। अब गांव के हैंडपंप नहीं सूख रहे हैं। भूगर्भ जल स्तर ठीक हो गया है। दूसरी तरफ पोखरे में मत्स्य पालन से ग्राम पंचायत की आमदनी भी हो रही है। इससे बेरोजगार को रोजगार भी मिल गया है। गांव के सुभाष,शिवकुमार, राम शरण, दिवाकर राय, पिटू,योगेश आदि कहते हैं कि यह पोखरा पशु पक्षियों का प्यास बुझा जीवन बचा रहा है। भूगर्भ जल स्तर भी ठीक हो गया है।

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- जल जीवन के लिए जरूरी है, चाहे जीवन मानव का हो ,पशु का हो अथवा वनस्पतियों का हो। सबका जीवन बचाना हम सब का नैतिक दायित्व है, प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़कर जल संरक्षित करने के लिए काम करना चाहिए। - डा. एमएम त्रिपाठी

पर्यावरणविद

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