देवरिया : आशाओं को अब स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही महिलाओं को हिसा के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। महिलाओं पर बढ़ती हिसा को रोकने की दिशा में शासन के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। महिलाओं के बीच रह कर कार्य करने व उनसे जुड़ाव के कारण ऐसा शासन ने माना है कि घरों में रहने वाली महिलाओं के बारे में सर्वाधिक जानकारी आशा कार्यकर्ताओं को रहती है। महिलाओं के बीच मजबूत पकड़ के कारण आशा कार्यकर्ता ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं के साथ होने वाली हिसा के प्रति जागरूक करेंगी। साथ ही महिला हिसा से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर धाराओं की जानकारी भी प्रदान करेंगी।

इसके तहत जिले के सभी ब्लाकों में आशाओं को महिला हिसा कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक कर गांव की महिलाओं को प्रेरित करने का कार्य किया जाएगा। विभाग का मानना है कि शुरू से ही यह समाज पुरुष सत्ता समाज रहा। समाज में महिलाओं को पुरुष की अपेक्षा कम तरजीह दिया गया। महिलाओं के जीवन के हर पक्ष पर पुरुष का नियंत्रण होता है। परिणाम स्वरूप महिलाओं को संसाधनों तक पहुंच कम होती है और परिवार में पुरुषों के मुकाबले उनकी आवाज कम या न के बराबर होती है। इसके चलते महिलाओं पर प्रभुत्व पुरुषों का होता है उनके साथ भेदभाव किया जाता है। इस व्यवस्था का पीढ़ी दर पीढ़ी सामाजिक कायदों और सांस्कृतिक मूल्यों के नाम पर शोषण होता है। इसमें महिलाओं का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है। पर अब महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए आशा बहुएं उन्हें जागरूक करेंगी।

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जनपद में महिला हिसा के खिलाफ आशाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक चार चरण में 398 आशाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

-डा.राजेश गुप्ता, जिला कम्युनिटी प्रबंधक, एनएचएम, देवरिया

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Posted By: Jagran

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