देवरिया: साहित्यकार डा.बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि मिथिलांचल की परंपरा में गीतों का बाहुल्य है। हमें गीत का संस्कार वहीं से मिला। जब हमने गीतों की यात्रा शुरू की तो देवरिया की धरती के डा.शंभूनाथ सिंह ने मार्गदर्शन किया। साहित्यकार मोती बीए की धरती मेरे लिए साहित्यिक तीर्थ है। वह सोमवार को नागरी प्रचारिणी सभा की तरफ से आयोजित गीत संध्या में एकल काव्य पाठ समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस दौरान उन्हें विश्व भोजपुरी सम्मेलन के महासचिव डा.अरुणेश नीरन, संजय कानोडिया, इंद्रकुमार दीक्षित, भृगुनाथ प्रसाद बरनवाल ने सारस्वत सम्मान से नवाजा। डा. बुद्धिनाथ मिश्र ने अपनी रचना अपनी चिट्ठी मां मुझसे लिखवाती, जो भी मैं लिखता हूं वह कविता हो जाती..से शुरुआत की। जिसकी खूब सराहना हुई। जिसे चाहा नहीं तुमने कभी वह चैन पाया क्या, यह सांसें तेज चलती हैं किसी का दिल चुराया क्या..प्रस्तुत किया। इसके बाद यह तुम्हारी कोपलों सी नई बाहें, और मेरे गुलमोहर से दिन, आज कुछ अनहोनियां करके रहेंगे, प्यार के यह मनचले पलछिन..सुनाया। अध्यक्षता कर रहे डा. अरुणेश नीरन ने डा.बुद्धिनाथ की रचनाओं की तारीफ की। संचालन डा.भावना सिन्हा ने किया। इस मौके पर दीपक मिश्र शाका, डा.विनय रावत आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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