देवरिया: जिला अस्पताल में तकरीबन तीन माह से दवाओं की कमी है। इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। हाल यह है कि ओपीडी में डाक्टर की लिखी दवाओं में आधा से भी कम दवाएं मरीजों को मिल रही हैं। जिसे लेकर आए दिन फार्मासिस्ट व तीमारदारों के बीच विवाद हो रहा है। दूर-दूर से आए गरीब मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। सीएमएस डा. एएम वर्मा ने बताया कि डिमांड भेजी गई थी। कुछ दवाएं वेयर हाउस में आ गई हैं। कुछ आने वाली हैं। दवाओं की कमी को दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। मरीजों को परेशानी न हो इसका ध्यान रखा जा रहा है। सुगर, बीपी, गैस की दवाएं नहीं मिलने से परेशानी

जिले के सभी विकास खंडों से काफी दूरी तय कर मरीज जिला चिकित्सालय इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मरीज तकरीबन पंद्रह दिन से सुगर, बीपी, गैस, झटके की दवा मरीजों को नहीं मिल रही हैं। जिससे काफी परेशानी उठानी पड़ रही हैं। इसकी दवा मरीज को लंबे समय तक चलाना होता है। ऐसे में दवाओं को बाहर से गरीबों को खरीदनी पड़ रही है। झटके की दवा भी दो-दो साल तक चलती है लेकिन दवा नहीं रहने से मरीजों की परेशानी बरकरार है। इसके अलावा अस्पताल में कैल्शियम, आयरन, एंटीबायोटिक तक नहीं है। इमरजेंसी में दवाओं की कमी से परेशानी

इमरजेंसी में दर्द, गैस समेत कई जीवन रक्षक दवाएं नहीं है। जिससे परेशानी उठानी पड़ रही है। दिन में तो मरीज दवाएं बाहर से खरीद कर इलाज करा ले रहे हैं रात में सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिलने से आए दिन इमरजेंसी में मारपीट की नौबत आ रही है।

Edited By: Jagran