देवरिया: लॉक डाउन के चलते पूरे देश में सबकुछ बंद हो गया है। कंपनी, मिल व ठेकेदारी बंद होने के चलते मजदूरों के सामने नया संकट आ गया है। काम करने वाले मजदूर अपने घर को जाने के लिए पैदल ही चल दिए हैं। दोहरीघाट निवासी पप्पू जायसवाल अपनी पत्नी रीता, बेटे विशाल, अंकित के साथ बैतालपुर में रहते थे और पेपर मिल में काम करते थे। पेपर मिल बंद होने के बाद वह अपने परिवार के साथ रविवार को पैदल ही गांव के लिए चल दिए। देवरिया में प्रशासन ने उनको भोजन कराया।

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रेलवे ट्रैक पकड़े और चल दिए गांव

खोरीबारी: बिहार के समस्तीपुर, मधेपुरा व दरभंगा के मजदूर देवरिया मजदूरी करने के लिए आए थे। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते उनका कार्य बंद हो गया है। जन किशन, बिजली, दिनेश, छोटेलाल, सिटू, पिटू, विक्रम, रामकृष्ण, झब्बू लाल, सतीश, दिलीप, बिरजू, बैजनाथ, अरुण अपने गांव के लिए पैदल ही चल दिए। रेलवे ट्रैक पकड़ कर वह पैदल जाते हुए भटनी में दिखे तो लोगों ने उन्हें रोक लिया। उनको भोजन कराया और फिर गांव जाने की बात कही। भोजन पाते ही उनका चेहरा खिल उठा।

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देवरिया से पैदल निकले गाजीपुर

बरहज, देवरिया: लाक डाउन के बीच परिवहन सेवा बंद है। जब रोजगार और रोटी ही नहीं रहा तो शहर में किसके सहारे रुके। यह कहना है देवरिया से अपने गांव गाजीपुर पैदल जा रहे भुजा बेचने वाले युवकों का। युवक देवरिया से पैदल चलकर बरहज पहुंचे थे। सरयू नदी पर पीपा पुल पार कर गाजीपुर अपने गांव जाएंगे। उन्हें करीब सौ किलोमीटर का सफर करना है।

सोनू यादव ग्राम बदेव, संदीप कुमार सहबपुर, सुखराम सनापुर बरेसर जनपद गाजीपुर और सुनील मौर्य रायगढ़ जिला चंदौली ने बताया कि यमुना सदन देवरिया में रहकर भुजा बेचते हैं। लाक डाउन से अब काम बंद हो गया। भोजन की भी व्यवस्था नहीं होने से पैदल गांव जा रहे हैं।

Posted By: Jagran

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