देवरिया : कर्तव्य की बलिवेदी पर मर मिटने वाले छपिया जयदेव के उस जाबांज बेटे विजय मौर्य का यह कैसा सम्मान है? पांच माह बीत गए, लेकिन न सड़क बन सकी और न ही विद्युतीकरण कार्य ही पूरा किया जा सका। शहादत पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले अफसर व जनप्रतिनिधि खामोश हैं। ऐसे में उनके रवैये पर सवाल उठने लगा है।

याद कीजिए 14 फरवरी के उस काले दिन को, जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर हमला किया था। उस हमले में देवरिया का लाल विजय मौर्य भी शहीद हो गए थे। देशभर में गम व गुस्से का माहौल था। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी छपिया जयदेव पहुंचे थे और श्रद्धांजलि अर्पित की थी। आखिर चंद महीनों में ही शहीद को कैसे भुला दिया गया? सड़क बन सकी न बिजली पोलों पर तार लटक सके। शहीद विजय के पिता रामायण कुशवाहा बुधवार को मर्माहत थे। वह डीएम अमित किशोर से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात न हो सकी। उन्होंने बताया कि दरवाजे तक सीसी रोड स्वीकृत है लेकिन अभी तक सड़क अधूरी है। आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। दरवाजे तक पोल गाड़ दिया गया लेकिन तार नहीं खींचा जा सका है। बारिश के कारण दरवाजे तक जल जमाव हो रहा है। एक पुलिया का इंतजाम किया गया है। कुछ लोग सड़क पर पुलिया नहीं लगाने दे रहे हैं। ग्राम प्रधान भी रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके चलते दरवाजे पर जलभराव हो जाता है। यदि पुलिया लग जाए तो जल निकासी की सुविधा हो जाएगी। डीएम से मिलकर इन समस्याओं को बताना चाहते हैं। एडीएम प्रशासन राकेश कुमार पटेल ने बताया कि यह विकास कार्य से जुड़े मामले हैं। इस संबंध में सीडीओ की तरफ से कार्रवाई की जानी है।

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Posted By: Jagran