देवरिया: जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महराज ने कहा कि माता-पिता सहित हिदू का अपमान मत करना। हिदू सिर्फ धर्म नहीं बल्कि एक विचारधारा है, जो हिमालय के समान स्थिर रहता है, चंद्रमा के समान शीतल रहता है।

जगद्गुरु ग्राम जिगिना मिश्र में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को श्रद्धालुओं को भगवत कथा रूपी अमृत का रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि जब देश के कल्याण की बात आती है तो सबको तिलांजलि देनी होगी। राष्ट्र को देवता मानो, राष्ट्र के आन-मान-सम्मान के लिए साम, दंड और भय का रास्ता अपनाकर देश की रक्षा करने की जरूरत है। जब तक दिव्यांगों की समस्या का समाधान नहीं होगा। तब तक राष्ट्र के समस्याओं का समाधान नहीं होगा। कंस वध का वर्णन करते हुए कहा कि कंस के केश को भगवान ने पकड़ा और सीधे मंच पर गिरा दिया। सारे संसार को लेकर कंस की छाती पर कूद गए।

रासलीला खत्म अब तो राष्ट्रलीला का वक्त

जगद्गुरु ने कहा कि श्रीकृष्ण की रासलीला समाप्त हो गई है, लेकिन रासलीला से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा। अब राष्ट्रलीला का वक्त है। देश में सब कुछ है। जिसको जो कार्य मिला है उसे निष्ठा से करिए। वही राष्ट्रवाद है। प्रतिभा रहेगी तो रोटी की कहीं कमी नहीं रहेगी। रामभद्राचार्य ने राम-जानकी, वत्स ऋषि व परशुराम के मंदिर का शिलान्यास किया।

इस दौरान एआइजी स्टांप डा. राधा कृष्ण मिश्र, कमलेश मिश्र, इंदूशेखर मिश्र, ब्रजेश मिश्र, सुशील मिश्र, अविनाश मिश्र, श्रीकांत मिश्र, न्यास अध्यक्ष गौतम मिश्र, भाजपा जिलाध्यक्ष डा.अंतर्यामी सिंह आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप