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देवरिया : मक्के की फसल में लगने वाले कीट फाल आर्मी के लिए मौसम अनुकूल है। ये कीट मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, गेहूं तथा गन्ना की फसल को नुकसान पहुंचाने का कार्य करते हैं। इन कीटों का प्रकोप तरकुलवा विकास खंड क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों में है।

जिला कृषि अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि इन कीटों से बचाव के लिए फसलों की निगरानी एवं सर्वेक्षण कार्य करना चाहिए। अंड परजीवी दो से पांच ट्राइकोग्रामा कार्ड एवं टेलोनोमस रेमस का प्रयोग अंडा देने की अवस्था में करने से इनकी संख्या की बढ़ोत्तरी में रोक लगाई जा सकती है। एनपीवी 250 एलई, मेटाराइजियम एनिप्सोली एवं नोमेरिया रिलाई आदि जैविक कीटनाशकों का समय से प्रयोग अधिक प्रभावशाली होता है। यांत्रिक विधि के तौर पर सायंकाल में सात से नौ बजे तक तीन से चार की संख्या में प्रकाश प्रपंच एवं छह से आठ की संख्या में बर्ड पर्चर प्रति एकड़ लगाना चाहिए। रासायनिक नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 फीसद ईसी 1.5 लीटर अथवा क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5 फीसद एससी की 150 ग्राम अथवा क्लोरपाइरीफास 20 फीसद ईसी की 1.25 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 फीसद की एक मिली प्रति लीटर पानी में छिड़काव कर किसान इस कीट से फसलों को बचा सकते हैं।

Posted By: Jagran

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