देवरिया में कोर्ट की सख्ती से पशु तस्कर मुठभेड़ मामले में बैकफुट पर पुलिस महकमा
देवरिया में पुलिस और पशु तस्कर के बीच मुठभेड़ मामले में न्यायालय की सख्ती के बाद पुलिस विभाग बैकफुट पर है। न्यायालय ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए थानाध्यक्ष के खिलाफ जांच का आदेश दिया था, जिसके बाद एसपी ने थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया है। इस मामले में अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया है, जिससे पुलिस विभाग में खलबली मची है।

जागरण संवाददाता, देवरिया। बिहार सीमा के बनकटा थाना क्षेत्र में पुलिस और पशु तस्कर के बीच हुई मुठभेड़ के मामले का न्यायालय के संज्ञान लेने के बाद पुलिस महकमा बैक फुट पर है। न्यायालय ने पशु तस्कर दिलीप सोनकर के मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए थानाध्यक्ष के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
एसपी ने जांच कर कार्रवाई के क्रम में थानाध्यक्ष गोरखनाथ सरोज को लाइन हाजिर कर दिया है। इसके अलावा एक एसआइ, हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसके विरुद्ध प्रशासन ने जनपद न्यायाधीश के यहां पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है। उस पर एक दिसंबर को निर्णय की तिथि नियत की गई है। इस प्रकरण को लेकर पुलिस महकमे में खलबली मची है।
12 नवंबर को बनकटा में गो तस्कर दिलीप सोनकर और बनकटा पुलिस के बीच मुठभेड़ को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सिरे से खारिज करते हुए प्राणघातक हमला व लूट के अंतर्गत रिमांड निरस्त कर दिया था।
घटना में संलिप्त दोषी पुलिसकर्मियों में उप निरीक्षक सुशांत पाठक, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार, कांस्टेबल सज्जन चौहान के विरुद्ध असंज्ञेय अपराध के तहत मुकदमा दर्ज कर अदालत को अवगत कराने का आदेश दिया था।
न्यायालय के आदेश का अनुपालन न करने पर सीजेएम देवरिया ने गोरखनाथ सरोज को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया था कि क्यों और किन परिस्थितियों में न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। विधि विशेषज्ञों के अनुसार थानाध्यक्ष गोरखनाथ सरोज का स्पष्टीकरण असंतोषजनक व आधारहीन था। इसे एसपी संजीव सुमन ने गंभीरता से लिया और गोरखनाथ सरोज को लाइन हाजिर कर दिया।

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