जागरण संवाददाता, देवरिया : जिले के ग्राम पंचायतों में पंचायत चुनाव के पहले प्रशासकों ने विकास कार्य के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया था। भुगतान पर जब अंगुली उठने लगी तो जुलाई में जांच टीम गठित की गई। अभी जांच अधूरी है। उधर जिले के चार ब्लाकों में जिन फर्मों को भुगतान किया गया है। शिकायत मिलने के बाद असिस्टेंट कमिश्नर प्रशासन ने खंड विकास अधिकारियों से संबंधित फर्म से टीन व जीएसटी नंबर मांगा है।

ग्राम प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए गए। प्रशासकों ने विकास कार्य कराने के नाम पर पूरे जिले में 33 करोड़ से अधिक रुपये निकाले। जिसमें कई ऐसे कार्य भी कराए गए, जो नियम विरुद्ध रहे। नए प्रधानों के निर्वाचन व शपथ ग्रहण के बाद शिकायतों की भरमार लग गई। जिलाधिकारी ने जुलाई में जांच के आदेश दिए। अभी तक जांच अधूरी है। बरहज में एक गांव में जांच में पांच लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इसी तरह अन्य गांवों में जांच हुई तो निकाले गए रुपये की पोल खुल जाएगी। उधर जीएसटी चोरी व अवैध होने की शिकायत मिलने के बाद असिस्टेंट कमिश्नर प्रशासन ने लार, सदर, बरहज व गौरीबाजार विकास खंड में कार्य कराने वाले फर्मों के बारे में जानकारी खंड विकास अधिकारियों से मांगी है। मुख्य विकास अधिकारी रवींद्र कुमार ने कहा कि जांच टीमें गठित की गई है। रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों का बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट शीघ्र मिल जाएगी।

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