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करेले की खेती ने बदली देवरिया के किसान की जिंदगी, दुबई की नौकरी छोड़ गांव में कर रहे 10 लाख सालाना कमाई

Published: Thu, 10 Sep 2026 07:00 AM (IST)

राजनाथ यादव ने दुबई की सुपरवाइजर की नौकरी छोड़कर देवरिया में दो बीघा खेत पर जैविक करेला और टमाटर की खेती शुरू की।

अपने खेत में किसान राजनाथ यादव

अपने खेत में किसान राजनाथ यादव

HighLights

  1. दुबई की नौकरी छोड़ जैविक खेती से सालाना 10 लाख मुनाफा।

  2. देवरिया के राजनाथ यादव बने जैविक करेला-टमाटर के सफल किसान।

  3. युवाओं को संदेश: मेहनत से खेत भी बन सकता है दुबई।

भगवान उपाध्याय, देवरिया। जब प्रदेश का युवा 10-12 हजार की नौकरी के लिए घर-परिवार और बूढ़े मां-बाप को छोड़कर महानगरों की ओर पलायन कर रहा है, तब तरौली के राजनाथ यादव ने इस धारणा को तोड़ दिया है कि रोजगार सिर्फ विदेश या सरकारी नौकरी में ही है।

दुबई में सुपरवाइजर की नौकरी छोड़कर उन्होंने अपने दो बीघा खेत में जैविक करैले और टमाटर की खेती से न सिर्फ अपना परिवार गुलजार किया है, बल्कि चार अन्य परिवारों का चूल्हा भी जला रहे हैं।

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भलुअनी विकास खंड के राजनाथ बताते हैं, आर्थिक तंगी के कारण 1998 में हाईस्कूल के बाद ही उन्हें दुबई के एक निजी कंपनी में जाना पड़ा। वहां रहकर परिवार का भरण-पोषण तो हुआ, लेकिन मन गांव में ही अटका रहा। चार साल पहले उन्होंने हिम्मत कर वापसी का फैसला लिया। कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यान विभाग से जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया।

सालाना 10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा

शुरुआत आसान नहीं थी। दो साल तक घाटा सहना पड़ा। लोगों ने ताने भी मारे कि दुबई छोड़कर करैला उगा रहा है। लेकिन तीसरे साल से तस्वीर बदल गई। आज टमाटर के सीजन में 30 से 40 हजार और बरसात में करैले पर 40 से 50 हजार खर्च आता है और मजदूरों की मजदूरी निकालकर सालाना 10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है।

खास बात यह है कि उनका उगाया जैविक करैला मधुमेह के मरीजों के लिए काफी मांग में है। केमिकल फ्री होने के कारण बरहज, देवरिया और गोरखपुर की मंडियों में हाथों-हाथ बिक जाता है।

राजनाथ कहते हैं, दुबई में 12 घंटे पसीना बहाकर जो मिलता था, आज गांव में आधे मेहनत में उससे ज्यादा मिल रहा है। फर्क सिर्फ इतना है, वहां पैसा था पर परिवार नहीं, यहां पैसा भी है और परिवार भी।

उनके तीन बेटों में दो नौकरी में हैं और एक देवरिया में पढ़ाई कर रहा है। आज के युवाओं को संदेश देते हुए वे कहते हैं, युवा सरकारी नौकरी को ही नौकरी समझते हैं। अगर अपनी मेहनत को अवसर में बदल दें तो खेत भी दुबई बन सकता है।

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